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This Article is From Mar 11, 2026

धौलपुर में अनिल अग्रवाल ने 66 अनाथ बेटियों की कराई शादी, अब तक 511 कन्याओं का कर चुके कन्यादान

राजस्थान में धौलपुर के तीर्थराज मचकुंड पर समाजसेवी अनिल अग्रवाल ने मानवता की अनोखी मिसाल पेश की. उन्होंने 66 अनाथ और निर्धन बेटियों की शादी एक ही मंडप के नीचे कराई. पिछले 18 वर्षों में वे अब तक 511 कन्याओं का कन्यादान कर चुके हैं.

धौलपुर में अनिल अग्रवाल ने 66 अनाथ बेटियों की कराई शादी, अब तक 511 कन्याओं का कर चुके कन्यादान
धौलपुर के तीर्थराज मचकुंड पर समाजसेवी अनिल अग्रवाल ने मानवता की अनोखी मिसाल पेश की.

Rajasthan News: राजस्थान के धौलपुर जिले में इंसानियत और परोपकार की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली. ऐतिहासिक तीर्थराज मचकुंड पर भामाशाह Anil Agarwal ने 66 अनाथ और निर्धन कन्याओं की शादी एक ही मंडप के नीचे कराई. इस आयोजन में अलग-अलग धर्मों की बेटियों को नया जीवन मिला. समारोह ने सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश भी दिया.

तीन धर्मों की बेटियों का एक साथ विवाह

सामूहिक विवाह समारोह में कुल 66 कन्याओं का विवाह कराया गया. इनमें 47 हिंदू, 9 मुस्लिम और 10 सिख धर्म से जुड़ी बेटियां शामिल थीं. सबसे खास बात यह रही कि इन 66 में से 44 बेटियों के माता-पिता या भाई नहीं हैं. ऐसे में अनिल अग्रवाल ने उनके अभिभावक बनकर कन्यादान किया और जीवनभर भाई और माता-पिता का फर्ज निभाने का संकल्प भी लिया.

आर्थिक संघर्ष से सेवा के रास्ते तक

अनिल अग्रवाल ने बताया कि उनके परिवार ने भी कभी आर्थिक तंगी का समय देखा है. समय के साथ हालात बदले और परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हुआ. इसके बाद माता-पिता की प्रेरणा से उन्होंने अनाथ, गरीब और बेसहारा बेटियों की शादी कराने का संकल्प लिया. करीब 18 साल पहले उन्होंने जरूरतमंद वर-वधू की तलाश कर सामूहिक विवाह की शुरुआत की थी.

नवदंपतियों को दिए जरूरी उपहार

विवाह के बाद सभी नवदंपतियों को नई जिंदगी की शुरुआत के लिए जरूरी सामान भी दिया गया. अनिल अग्रवाल की ओर से आभूषण, कपड़े, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भेंट किए गए. इसके साथ ही दूल्हा-दुल्हन के पैर पूजन कर दक्षिणा भी दी गई. समारोह में आए बारातियों को सम्मानपूर्वक भोजन कराया गया.

ग्रामीण और डांग क्षेत्र की बेटियों पर विशेष ध्यान

अनिल अग्रवाल ने बताया कि उनका ध्यान खासतौर पर ग्रामीण और डांग क्षेत्र की उन बेटियों पर रहता है जिनकी शादी आर्थिक कारणों से नहीं हो पाती. जिन बेटियों के माता-पिता नहीं होते उनके लिए वर की तलाश कर शादी कराई जाती है.

शादी के बाद भी निभाते हैं भाई का रिश्ता

उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य सिर्फ शादी कराना नहीं है. शादी के बाद भी वे हर बहन के संपर्क में रहते हैं. रक्षाबंधन, करवा चौथ जैसे त्योहारों और पारिवारिक रस्मों में भी उनका साथ निभाते हैं.

अब तक 511 बेटियों की हो चुकी शादी

यह सामूहिक विवाह सम्मेलन आठवां आयोजन था. इससे पहले सात सम्मेलनों में 511 बेटियों की शादी कराई जा चुकी है. इस बार हुए समारोह में पहले से विवाहित बेटियों को भी विशेष मेहमान के रूप में बुलाया गया.

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