Body Donation in Barmer: पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर से एक ऐसी खबर साने आई जिसने समाज में मानवता की नई मिसाल पेश की है. जिले में 107 वर्षीय धनी देवी के निधन के बाद उनके परिजनों ने पारंपरिक अंतिम संस्कार की जगह उनकी देहदान का फैसला लिया है. जिसके बाद धनी देवी की पार्थिव देह आज ( शुक्रवार) बाड़मेर मेडिकल कॉलेज को पूरे सम्मान के साथ सौंप दी गई, जहां मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और रिसर्च के लिए वह काम आएगी.
पांच पीढ़ियों ने लिया देह दान का फैसला
रामसर कुआ की रहने वाली धनी देवी की शुक्रवार को बलदेव नगर में उनके घर पर मृत्यु हो गई. सामूहिक चर्चा के बाद उनके बेटे, पोते और पड़पोते समेत पांच पीढ़ियों के सदस्यों ने रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करने के बजाय उनके शरीर को दान करने का फैसला किया. इसके बाद सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में उनके शरीर को पूरे सम्मान के साथ एम्बुलेंस से बाड़मेर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया और वहां उनका शरीर अस्पताल प्रशासन को सौंप दिया गया.

बाड़मेर मेडिकल कॉलेज
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अंतिम इच्छा थी कि किसी के काम आ सकूं
मां की देह को दान करने को लेकर बेटे ईश्वरलाल ने बताया कि माताजी की हमेशा से इच्छा थी की मरने से बाद उनकी देह को दान कर दिया जाए. जिससे मेडिकल छात्रों के वह काम आ जाए. हमने उनकी इसी अंतिम इच्छा का सम्मान किया है.
चिकित्सा जगत ने जताया आभार
वही धानी देवी के परिजनों के इस कदम की मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर ओमप्रकाश माली ने सराहना की. उन्होंने कहा कि वह इसके लिए परिवार का धन्यवाद करते है.उन्होंने बताया कि एमबीबीएस के छात्रों के लिए मानव देह पर प्रैक्टिकल रिसर्च करना पढ़ाई का सबसे अहम हिस्सा है.वहीं, मेडिकल छात्र मनीष सिंह ने बताया कि देहदान से उन्हें शरीर की बारीकियों को समझने और सीखने में बहुत मदद मिलती है.