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भरतपुर: आरबीएम अस्पताल की रिजर्व जमीन पर विवाद, कांग्रेस ने बीडीए पर लगाए प्लाटिंग के आरोप

राजस्थान में भरतपुर के आरबीएम अस्पताल के सामने स्थित स्कीम नंबर 10 की जमीन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. कांग्रेस नेताओं ने अस्पताल के लिए रिजर्व भूमि पर प्लाटिंग के आरोप लगाए हैं.

भरतपुर: आरबीएम अस्पताल की रिजर्व जमीन पर विवाद, कांग्रेस ने बीडीए पर लगाए प्लाटिंग के आरोप
भरतपुर आरबीएम अस्पताल.

Rajasthan News: राजस्थान के भरतपुर संभाग के सबसे बड़े आरबीएम अस्पताल के सामने स्थित स्कीम नंबर 10 की खाली जमीन इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है. कांग्रेस नेताओं और स्थानीय विधायक का आरोप है कि यह जमीन अस्पताल के विस्तार के लिए पहले से आरक्षित थी लेकिन अब इस पर भरतपुर विकास प्राधिकरण द्वारा प्लाटिंग की जा रही है.

अस्पताल विस्तार के लिए थी जमीन रिजर्व

कांग्रेस का कहना है कि यह भूमि कॉटेज वार्ड कैंसर यूनिट स्पाइन सर्जरी सेंटर पैरामेडिकल कॉलेज और मरीजों व परिजनों की सुविधाओं के लिए तय की गई थी. 14 जून 2021 को लगभग 25000 वर्गमीटर भूमि को रिजर्व किया गया था लेकिन साढ़े चार साल बाद भी इसका वास्तविक उपयोग नहीं हो सका.

कांग्रेस नेताओं ने जताया विरोध

मामला सामने आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और स्थानीय विधायक डॉ सुभाष गर्ग ने सोशल मीडिया पर विरोध दर्ज कराया. नेताओं का कहना है कि यदि इस जमीन का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं के बजाय अन्य कार्यों में किया गया तो आमजन को नुकसान उठाना पड़ेगा.

बीडीए ने आरोपों को बताया गलत

बीडीए आयुक्त कनिष्क कटारिया ने स्पष्ट किया कि आरबीएम अस्पताल के पास 25000 वर्गमीटर से अधिक भूमि अस्पताल विस्तार वार्ड स्टाफ सुविधाओं मरीजों के लिए सुविधा और पब्लिक पार्किंग के लिए चिन्हित है. इस भूमि की किसी भी प्रकार की नीलामी नहीं की जा रही है.

ट्रॉमा सेंटर और एमसीएच अस्पताल की योजना

बीडीए सचिव सुरेश नवल ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग की नजदीकी और शहर के ट्रैफिक को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के पास एसपीजेड योजना में 19176.68 वर्गमीटर भूमि ट्रॉमा सेंटर यूनिट और मां एवं शिशु अस्पताल के लिए आवंटित की गई है.

खबर को बताया भ्रामक

बीडीए सचिव ने कहा कि एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर भ्रामक है. उसमें दिखाया गया चित्र योजना के किसी अन्य क्षेत्र का है. बीडीए केवल विक्रय योग्य क्षेत्रों में कार्य कर रहा है और पात्र खातेदारों को भूमि के बदले भूमि देने की प्रक्रिया जारी है.

सरकार ने जताई प्रतिबद्धता

बीडीए अधिकारियों के अनुसार राज्य सरकार आमजन मरीजों और भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

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