Bikaner News: राजस्थान में इन दिनों हांड़ कंपा देने वाली सर्दी और घने कोहरे ने जनजीवन थाम सा दिया है. जहां लोग घरों में दुबके हैं, वहीं बीकानेर से आई एक तस्वीर ने दिल को छू के रख दिया. यह तस्वीर किसी आम इंसान की नहीं, बल्कि एक मां के लिए उसके बेटे के प्यार को दिखाती जो यह दर्शाती है कि बेटे मीलों दूर चला जाएं लेकिन मां के लिए वह हमेशा उसके पास ही रहता है. और जब तक वह रहती है वह उसकी फिक्र करना कभी नहीं छोड़ती.
"उसे ठंड लग रही होगी..."
बीती रविवार की शाम जब बीकानेर कोहरे की चादर में लिपटा था और पारा शून्य के करीब पहुंच रहा था, तब एक मां का दिल अपने शहीद बेटे के लिए तड़प उठा.23 साल पहले देश के लिए जान न्योछावर करने वाले कैप्टन चंद्र चौधरी आज भी अपनी मां की यादों और अहसासों में उतने ही जीवित हैं, जितने वो पहले थे। मां को लगा कि चौराहे पर खुले आसमान के नीचे खड़ी उनके लाडले की प्रतिमा को भी वैसी ही ठंड लग रही होगी, जैसी किसी जीते-जागते इंसान को लगती है.

शहीद कैप्टन चंद्र चौधरी
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मां का आदेश और भाई का फर्ज
23 साल पहले देश के लिए शहीद होने वाले कैप्टन चंद्र चौधरी आज भी अपनी मां की यादों में जिंदा हैं. शहीद के भाई सीताराम सियाग ने बताया कि उनके बड़े भाई 23 साल पहले शहीद हुए थे. उनके जाने के बाद भी मां को हर समय उनकी याद बंधी रहती है. कड़ाके की ठंड में, मेरे भाई की मूर्ति को देखकर मेरी मां ने मुझसे कहा कि ठंड बढ़ रही है और लगता है उसे ठंड लग रही होगी।. उसे कंबल ओढ़ा दो. पहले तो मैं हिचकिचाया लेकिन मां की भावनाओं का सम्मान करते हुए, मैं कड़ाके की ठंड में अपने भाई को कंबल ओढ़ाने आया हूं ताकि उन्हें ठंड न लगे.
जम्मू-कश्मीर में हुए थे शहीद
कैप्टन चंद्र चौधरी भारतीय सेना के वो जांबाज अधिकारी थे, जिन्होंने 9 सितंबर 2002 को जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में आतंकियों से लोहा लेते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था. 'द ग्रेनेडियर्स' रेजिमेंट के इस शूरवीर की याद में उनके पैतृक गांव बिग्गाबास रामसरा में एक स्मारक और मिग-21 विमान स्थापित किया गया है, जो आज भी युवाओं में देशभक्ति का जज्बा भरता है.
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