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Lok Sabha 2024: कौन हैं प्रियंका चौधरी? त्रिकोणीय मुकाबले में बुरी फंसी भाजपा के लिए बन चुकी हैं संकट मोचक

भाजपा बाड़मेर-जैसलमेर-बालोतरा लोकसभा सीट पर बिगड़े समीकरण को देखते हुए भाजपा प्रत्याशी और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने विधानसभा चुनाव 2023 में बाड़मेर विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिलने पर बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़कर विधायक चुनी गई प्रियंका चौधरी को मनाने का बीड़ा उठाया है.

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Lok Sabha 2024: कौन हैं प्रियंका चौधरी? त्रिकोणीय मुकाबले में बुरी फंसी भाजपा के लिए बन चुकी हैं संकट मोचक
कैलाश चौधरी और सीएम भजनलाल शर्मा

Rajasthan Elections: लोकसभा चुनाव 2024 में राजस्थान के बाड़मेरजैसलमेर-बालोतरा लोकसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होने के चलते भाजपा चारों खाने चित्त नजर आ रही है, जिससे पार्टी के मिशन 25 पर खतरा मंडरा रहा है. मिशन 25 पर मंडराते खतरे को देखते हुए अब पार्टी डैमेज कंट्रौल में जुट गई है, लेकिन पूर्व गवर्नर सतपाल मलिक से निर्दलीय विधायक प्रियंका चौधरी के पारिवारिक रिश्तों के कारण भाजपा के लिए यह टास्क टेढ़ी खीर साबित हो सकता है.

भाजपा बाड़मेर-जैसलमेर-बालोतरा लोकसभा सीट पर बिगड़े समीकरण को देखते हुए भाजपा प्रत्याशी और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने विधानसभा चुनाव 2023 में बाड़मेर विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिलने पर बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़कर विधायक चुनी गई प्रियंका चौधरी को मनाने का बीड़ा उठाया है.

बाड़मेर विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिलने पर बागी चुनाव लड़कर निर्दलीय विधायक चुनी गईं प्रियंका चौधरी कई बार विधायक मंत्री और प्रोटेम स्पीकर रहे दिग्गज गंगाराम चौधरी की पोती है. विधानसभा चुनाव 2013 में भाजपा की टिकट पर बाड़मेर विधानसभा से चुनाव लड़ी प्रियंका चौधरी को भीतरघात के चलते हार का सामना करना था.

बागी प्रियंका चौधरी ने निर्दलीय लड़कर जीता था चुनाव

विधानसभा चुनाव 2023 में भी प्रियंका चौधरी को बाड़मेर विधानसभा से भाजपा की टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन पूर्व राज्यपाल सतपाल मलिक से पारिवारिक रिश्तों के चलते प्रियंका चौधरी का टिकट काट दिया गया, जिसके चलते प्रियंका चौधरी ने भाजपा से बगावत करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ी और जीत गईं.

जाट बहुसंख्यक सीट है बाड़मेर-जैसलमेर-बालोतरा सीट

बाड़मेर-जैसलमेर-बालोतरा सीट पर जाट समाज में बड़ा दबदबा माना जाता है. प्रियंका चौधरी का टिकट कटने से बाड़मेर में भाजपा के प्रति जाट समाज में जबरदस्त नाराजगी देखने को मिली थी. इसका ही असर था बाड़मेर, बायतु, चौहटन गुड़ामालानी और शिव विधानसभा सीटों पर भाजपा का जाट वोट बैंक खिसक गया.

जाट वोट खिसकने से बाड़मेर,बायतु व शिव सीट गंवा बैठी भाजपा

विधानसभा चुनाव 2023 में बडी जीत के बावजूद पार्टी बाड़मेर, बायतु और शिव विधानसभा सीट से बुरी तरह से हार गई, जबकि अन्य सीटों पर मुश्किल से भाजपा जीत पाई थी. विधानसभा चुनाव में बायतु विधानसभा सीट से आरएलपी के टिकट पर चुनाव लड़े  उमेदाराम बेनीवाल ने प्रियंका चौधरी को बाड़मेर सीट से निर्दलीय लड़ाने में अहम भूमिका निभाई थी.

आरएलपी के समर्थन चुनाव जीतने में सफल रहीं थी प्रियंका चौधरी 

निर्दलीय विधायक प्रियंका चौधरी ने जीत के बाद आरएलपी का समर्थन दिलाने के लिए उम्मेदा राम बेनीवाल का धन्यवाद किया था, जिसके बाद से ये संभावनाएं जताई जा रही थी कि प्रियंका चौधरी कांग्रेस के प्रत्याशी उमेदाराम बेनीवाल को सपोर्ट कर सकती है, जिसको लेकर भाजपा प्रत्याशी और पदाधिकारी प्रियंका चौधरी को मनाने में जुट गए हैं.

सतपाल मलिक से पारिवारिक रिश्तों के चलते टेढ़ी खीर है डैमेज कंट्रोल

अंदर खाने से यह बात निकाल कर भी सामने आ रही है कि सतपाल मलिक से पारिवारिक रिश्तों के चलते प्रियंका चौधरी का पार्टी को समर्थन देने का मामला बैठ नहीं पा रहा है. ऐसे में कैलाश चौधरी प्रियंका चौधरी को मना कर अपने समर्थन में लाने की कोशिशें में लगे हुए हैं. इस कार्य में सफलता की गुंजाइश बेहद कम है, लेकिन राजनीति में कुछ भी संभव होता है.

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