
Rajasthan Politics: भारतीय जनता पार्टी के ये दो चर्चित नेता जिन्होंने टिकट न मिलने पर पार्टी का दामन छोड़ दिया और निर्दलीय चुनाव लड़कर अपनी जीत दर्ज की. हम बात कर रहे हैं शिव विधानसभा से जीत दर्ज कर चुके निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी और चित्तौड़गढ़ सीट से बतौर निर्दलीय चुनाव जीतने विधायक चंद्रभान सिंह आक्या की. भाटी ने अपनी जीत के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी से मुलाकात की थी तो वहीं आक्या ने भी कुछ दिन पहले जेपी नड्डा से मुलाकात की.
बता दें कि भाजपा ने 2023 के विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत प्राप्त किया है. फिलहाल पार्टी बिना समर्थन के भी अपना मुख्यमंत्री बना सकती है. लेकिन अगर इन विधायकों का पार्टी को समर्थन मिलेगा तो 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को फायदा मिल सकता है.
दिल्ली गए थे आक्या
चित्तौड़गढ़ सीट से बतौर निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद गुरुवार को विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से दिल्ली पहुंचकर मुलाकात की. उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा को अपना समर्थन-पत्र सौंपा. इससे पहले आक्या ने ओम प्रकाश माथुर से मुलाकात की, आक्या माथुर के काफी करीबी माने जाते हैं. इसके बाद उन्होंने भाजपा राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष से भी मिलें. चुनाव जीतने के बाद से ही आक्या राजधानी दिल्ली में है.
भाटी ने छात्रसंघ से की एंट्री
राजपूत परिवार में जन्मे श्री भाटी का राजनीति में प्रवेश 2019 में छात्र राजनीति के माध्यम से शुरू हुआ. भाटी मारवाड़ क्षेत्र के प्रख्यात विश्वविद्यालय, जेएनवीयू से चुने गए पहले स्वतंत्र अध्यक्ष बनें. 26 वर्षीय निर्दलीय उम्मीदवार रविंद्र सिंह भाटी ने हाल के विधानसभा चुनावों में लहर पैदा कर दी है. टिकट विवादों से अलग होने से पहले शुरुआत में भाजपा के साथ जुड़कर भाटी ने बाड़मेर के शिव निर्वाचन क्षेत्र में शानदार जीत हासिल की. निर्णायक चुनावी लड़ाई में रविंद्र सिंह भाटी ने निर्दलीय उम्मीदवार फतेह खान को लगभग 4,000 वोटों के अंतर से हराया. साथ ही पीछे रहने वाले दावेदारों में कांग्रेस से अमीन खान और भाजपा से स्वरूप सिंह खारा थे. भाटी ने शिव विधानसभा सीट से टिकट मांगा था, हालांकि जब भाजपा ने उनका टिकट काट दिया तो वे बागी हो गए.
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