राजस्थान विधानसभा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संबोधन के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली. मुख्यमंत्री ने सरकार के कामकाज और योजनाओं की प्रगति का विस्तृत विवरण देते हुए दावा किया कि अब तक की गई घोषणाओं में लगभग 80 प्रतिशत को या तो पूरा कर लिया गया है या उन्हें धरातल पर लागू कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस गरीब, किसान, मजदूर और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने पर रहा है.
मुख्यमंत्री ने सदन में आंकड़ों के आधार पर अपनी सरकार के प्रदर्शन को बेहतर बताते हुए कहा कि दो वर्षों के कार्यकाल में किसानों और युवाओं के लिए उल्लेखनीय फैसले किए गए हैं. उन्होंने बताया कि वर्ष 2025–26 में कुल 2,719 घोषणाएं की गईं, जिनमें से 919 पूरी हो चुकी हैं, जबकि 1,531 पर काम तेजी से जारी है. उनके अनुसार कुल घोषणाओं में से 2,450 योजनाएं या तो पूरी हो चुकी हैं या क्रियान्वयन के चरण में पहुंच चुकी हैं.
''दो साल में 10 लाख से अधिक नए पेंशन लाभार्थी जोड़े गए''
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दो साल में 10 लाख से अधिक नए पेंशन लाभार्थी जोड़े गए और सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर लगभग 16 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए. विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन योजना में भी व्यय और लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि का दावा किया गया. बीपीएल आवास आवंटन और निर्माण श्रमिक कल्याण योजना में भी पूर्व सरकार की तुलना में अधिक लाभार्थियों को सहायता देने की बात कही गई. मुख्यमंत्री के अनुसार निर्माण श्रमिकों को दी गई सहायता राशि और लाभार्थियों की संख्या दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है.
''सरकार ने मुद्दे से ध्यान भटका दिया''
मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान विपक्ष ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि सदन में पहले “2 साल बनाम 5 साल” पर चर्चा तय थी, लेकिन सरकार ने मुद्दे से ध्यान भटका दिया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं इस चर्चा के प्रस्तावक थे, लेकिन बाद में इससे पीछे हट गए.
जूली ने मुख्यमंत्री के भाषण की शैली और स्वर पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना नेता सदन की जिम्मेदारी होती है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी उपलब्धियों के प्रचार के लिए विधानसभा मंच और सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल कर रही है. विपक्ष ने यह भी कहा कि चर्चा का दायरा बदलकर सरकार अब अलग-अलग समयावधि की तुलना करने लगी है.