Rajasthan Politics: राजस्थान की राजनीति में राजेंद्र राठौड़ का नाम आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना उस दौर में था जब वे वसुंधरा राजे की कैबिनेट में एक प्रभावशाली मंत्री हुआ करते थे. इस बार विधानसभा चुनाव हारने के बाद भले ही वे सत्ता के केंद्र में न दिखें, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ और रणनीतिक भूमिका कम नहीं हुई है. और यह बात उनके दिए गए ‘बाबोसा' बयान और उस पर मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर की प्रतिक्रियाओं से साफ़ देखने को मिली. बता दें, चूरू में जनरल सगत सिंह की मूर्ति अनावरण का कार्यक्रम था. मंच पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर, राजेंद्र राठौड़ और मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा मौजूद थे.
राजेंद्र राठौड़ ने क्या कहा
राजेंद्र राठौड़ का चुनावी क्षेत्र चूरू का तारानगर रहा है. यहां मंच से अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जब उन्होंने यहां से अपनी राजनीति की शुरुआत की, तो लोग कहते थे, “राजू भैया आए हैं.” उन्होंने याद किया कि संगठन में रहे ओम माथुर के कहने पर उन्होंने चूरू में सक्रिय राजनीति की. यहां से वे 7 बार विधायक चुने गए हैं. उन्होंने कहा कि इस लंबे सफर में वे “राजू भैया” से “राजेंद्र भाईसाब” बने, फिर “काका” और अब “बाबोसा” या “ताऊ” भी कहलाने लगे हैं.
राजेंद्र जी को बाबोसा मत बनाओ- ओम माथुर
लेकिन मंच संभालते ही ओम माथुर ने राजेंद्र राठौड़ के ‘बाबोसा' बयान का जवाब देते हुए कहा, “राजेंद्र जी के लिए क्या कहूँ, इतना ज़रूर कहूंगा कि इनको बाबोसा मत बनाओ. अभी उम्र कम है. बाबोसा कर दिया तो गड़बड़ हो जाएगी, आप सावधान रहना. राजू भैया ठीक है. बाबोसा को लेकर कई नियम बने हुए हैं, कहीं वो नियम लागू न हो जाएं.”
सूत्रों के अनुसार, कई बार मुख्यमंत्री भी राजेंद्र राठौड़ और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहे अरुण चतुर्वेदी से अनौपचारिक रूप से राजनीतिक सलाह लेते रहते हैं.
बाबोसा नहीं कहेंगे मंच पर भाभी जी हैं- सीएम भजनलाल
मंच पर अपना भाषण शुरू करते ही मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने भी इसी अंदाज़ को दोहराया. उन्होंने वरिष्ठ नेताओं को संबोधित करते हुए राजेंद्र राठौड़ के बारे में कहा, “आपके अपने लाडले, जिनका हमेशा नीचे के कार्यकर्ता से लेकर सभी कार्यकर्ताओं से जीवंत संपर्क रहता है-आपके नेता, सम्माननीय राजेंद्र राठौड़ जी. आज आपने कहा कि उन्हें बाबोसा बना रहे हैं. हम कहेंगे, अभी बाबोसा नहीं. अभी भाभीजी भी मंच पर विराजमान हैं, तो मैं तो उन्हें भाईसाब और भाभीजी ही कहूँगा. बाबोसा कहने के लिए अभी थोड़ा समय है.”
भाजपा के भरोसेमंद सहयोगी और बैक-रूम स्ट्रैटेजिस्ट के तौर पर राठौड़ ने वर्षों तक संगठन और सरकार दोनों में “ट्रबलशूटर” की भूमिका निभाई है. अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत में ही वे भैरों सिंह शेखावत सरकार में एक युवा मंत्री के रूप में उभरे थे. इसके बाद वसुंधरा राजे के दोनों कार्यकालों में वे मंत्रिमंडल का हिस्सा रहे. साथ ही उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ संभालीं और पार्टी की रणनीति को दिशा देने में अहम भूमिका निभाई.
आज भले ही वे मुख्यधारा की सत्ता राजनीति से थोड़ा दूर दिखाई दें, लेकिन उन्हें “राजनीतिक वनवास” में मान लेना जल्दबाज़ी होगी. राजस्थान भाजपा की अंदरूनी रणनीति और समीकरणों में राजेंद्र राठौड़ अब भी एक महत्वपूर्ण और असरदार चेहरा बने हुए हैं. और यह बात उस मंच पर साफ़ तौर पर दिखाई भी दी, जब राजेंद्र राठौड़, ओम माथुर और भजन लाल शर्मा के बीच हल्की-फुल्की नोकझोंक और तंज भरे संवाद हुए. इन टिप्पणियों में भले ही हास्य और व्यंग्य का पुट था, लेकिन इसके पीछे छिपा राजनीतिक संकेत साफ़ था—राठौड़ अब भी सियासी समीकरणों में उतने ही प्रासंगिक हैं.
मंच पर हुई इस चुटीली बातचीत ने यह जता दिया कि भले ही वे फिलहाल सत्ता के केंद्र में न हों, लेकिन उनकी मौजूदगी और प्रभाव को नज़रअंदाज़ करना आसान नहीं है.
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