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Rajasthan: अफसरों ने बताया करोड़ों का एस्टीमेट, पब्लिक ने चंदा इकट्ठा कर 60 हजार में बना दी सड़क!

गंगापुर सिटी के वार्ड 49 वालों ने 'दशरथ मांझी' बनकर सिस्टम को आइना दिखा दिया है. जिस सड़क के लिए अफसर करोड़ों का बजट बता रहे थे, लोगों ने चंदा कर उसे नाममात्र के खर्चे में बना डाला.

Rajasthan: अफसरों ने बताया करोड़ों का एस्टीमेट, पब्लिक ने चंदा इकट्ठा कर 60 हजार में बना दी सड़क!
सड़क बनने से पहले और बाद की तस्वीर.
NDTV Reporter

Rajasthan News: बारिश का मौसम आते ही हमारे शहरों की सड़कें तालाब बन जाती हैं. हम प्रशासन को कोसते हैं, नेताओं को ज्ञापन सौंपते हैं और फिर उसी कीचड़ से निकलने को मजबूर हो जाते हैं. लेकिन गंगापुर सिटी के वार्ड नंबर 49 के लोगों ने जो किया है, वह पूरे देश के लिए एक मिसाल है.

जब प्रशासन ने बड़े बजट का बहाना बनाकर हाथ खड़े कर दिए, तो यहां के स्थानीय लोगों ने 'दशरथ मांझी' की तरह खुद फावड़ा उठा लिया. लोगों ने चंदा इकट्ठा किया और जिस सड़क के निर्माण का खर्च अधिकारी करोड़ों में बता रहे थे, उसे 'जुगाड़' से महज 60 हजार रुपये में पक्का कर दिया. 

'3 महीने तक बंद हो जाता था रास्ता'

वार्ड नंबर 49 का यह करीब 2 किलोमीटर का रास्ता कोई आम गली नहीं है. यह गंगापुर सिटी के औद्योगिक क्षेत्र (RIICO) और शिक्षण संस्थाओं को सीधा सिकन्दरा हाईवे से जोड़ने वाला एक अहम बायपास है. दिनभर इस रास्ते से ट्रकों, स्कूल बसों और ट्रॉलियों की आवाजाही रहती है. लेकिन सड़क पूरी तरह कच्ची और गढ्ढों में तब्दील हो चुकी थी. बारिश के दिनों में ऊपर से बहकर आने वाला पानी इस सड़क पर जमा हो जाता था, जिससे 3 महीने तक यह रास्ता पूरी तरह बंद रहता था. लोगों ने हर स्तर पर ज्ञापन दिए, नेताओं के चक्कर काटे, लेकिन जवाब सिर्फ एक मिला- 'अभी बजट नहीं है, इसका निर्माण करोड़ों में होगा.'

'मास्टर जी' की पहल से शुरू हुआ चंदा

लगातार आश्वासनों से थक चुके स्थानीय लोगों ने हार मानने के बजाय खुद रास्ता निकालने की ठानी. कॉलोनी में रहने वाले सरकारी अध्यापक शिम्भु दयाल ने बताया कि कुछ दिन पहले वार्ड की मीटिंग हुई, जिसमें तय किया गया कि अब किसी की राह नहीं देखनी है. बारिश से पहले सड़क हम खुद बनाएंगे. फिर हर परिवार ने अपनी क्षमता के अनुसार पैसा दिया और काम शुरू हो गया. लोगों ने टूटी हुई सड़कों का कच्चा माल और बेकार पड़ा सीमेंट-कंक्रीट का मलबा मंगवाया. उसे गढ्ढों में बिछाया, ऊपर से पानी का छिड़काव किया और मोटर रोलर चलवाकर सड़क को मजबूत कर दिया. हालांकि अभी काम पूरा होना बाकी है.

वार्ड के ही एक अन्य सरकारी अध्यापक राकेश ने बताया कि 250 मीटर तक इस मजबूत रोड को तैयार करने में मात्र 60 हजार रुपये का खर्च आया है. अगर 1 लाख रुपये का सहयोग और मिल जाए, तो पूरा रास्ता ही शानदार हो जाएगा.

सड़क तो बना ली, लेकिन सूखे कंठ का क्या?

इस कॉलोनी में करीब 300 मतदाता रहते हैं और 90 फीसदी लोगों के पास पट्टे हैं. इसके बावजूद यह इलाका शहरी सुविधाओं से पूरी तरह महरूम है. एनडीटीवी की टीम जब यहां पहुंची, तो सिस्टम की एक और नाकामी सामने आई. सड़क भले ही लोगों ने बना ली, लेकिन यहां पीने के पानी का भारी संकट है. वार्ड की निवासी पूजा और रेखा ने खाली बर्तन दिखाते हुए अपनी आपबीती सुनाई. हर घर में नल के कनेक्शन तो हैं, लेकिन उनमें एक बूंद पानी नहीं आता. महिलाओं को पानी के लिए कुओं या महंगे टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है. इसके अलावा, नाले जाम होने से गंदा पानी घरों के बाहर जमा रहता है, जिसकी कभी सफाई नहीं की गई.

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