Rajasthan News: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ से शिक्षा विभाग में नौकरी पाने के लिए अपनाई गई एक बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. चित्तौड़गढ़ जिले के भदेसर थाना क्षेत्र स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय बानसेन में तैनात एक शिक्षक ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर सरकारी पद हासिल किया था. विभाग की सख्ती और मेडिकल बोर्ड द्वारा दोबारा की गई जांच में इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हो गया है.
कैसे खुला राज?
आरोपी शिक्षक चंद्रेश कुमार ने वर्ष 2022 की शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान दिव्यांग कोटे का लाभ उठाकर नौकरी प्राप्त की थी. समय बीतने के साथ ही इस चयन पर संदेह जताया गया, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने इसे गंभीरता से लिया. उच्च अधिकारियों के निर्देश पर जब मेडिकल बोर्ड द्वारा चंद्रेश कुमार का री-मेडिकल कराया गया, तो जांच में पाया गया कि उसकी दिव्यांगता का प्रतिशत सरकारी भर्ती के लिए तय किए गए न्यूनतम मापदंडों से काफी कम है.
पुलिस ने दर्ज किया गंभीर धाराओं में मुकदमा
मामले की गंभीरता को देखते हुए बानसेन स्कूल की प्रधानाचार्य शशि ने पुख्ता दस्तावेजों के साथ पुलिस अधीक्षक को परिवाद सौंपा. इसके आधार पर भदेसर पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है. थानाधिकारी विनोद मेनारिया ने बताया कि पुलिस अब शिक्षा विभाग से संबंधित मूल दस्तावेज जुटा रही है और मामले की गहन जांच की जा रही है.
निदेशालय की सख्ती से मचा हड़कंप
प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर ने पहले ही स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि 2016 से 2022 तक की भर्तियों में दिव्यांग कोटे से नियुक्त हुए सभी कार्मिकों की दिव्यांगता का फिर से परीक्षण किया जाए. कार्मिक विभाग का आदेश है कि यदि कोई प्रमाण-पत्र फर्जी पाया जाता है, तो तुरंत एफआईआर दर्ज कर एसओजी को सूचित किया जाए.
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