Kota Panchayat Election 2026: राजस्थान में पंचायत चुनावों की आहट के साथ ही गांव-गांव में स्थानीय मुद्दे फिर से चर्चा में हैं. कोटा जिले की सुल्तानपुर पंचायत समिति के डूंगरजा गांव में इस बार राजनीति का केंद्र कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि गांव की आस्था का प्रतीक 'कमल सरोवर' है जिसके विकास का ग्रामीण आंचल में जोर पकड़े हुए है. जहां एक ओर आस्था की अखंड परंपरा चल रही है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी विकास की मांग अब चुनावी बहस का हिस्सा बन चुकी है.

30 वर्षों से अखंड ज्योत प्रज्वलित है
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30 सालों से जल रही अखंड ज्योत, रामायण का भी हो रहा पाठन
डूंगरजा गांव का कमल सरोवर सिर्फ एक जलाशय नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है. यहां स्थित बाला जी महाराज मंदिर में पिछले 30 वर्षों से अखंड ज्योत प्रज्वलित है, जिसके साथ लगातार बिना रुके रामायण पाठ किया जाता है. जिसके पाठन के लिए चाहे मौसम कैसा भी हो गांव के लोग बारी-बारी यहां पहुंचकर करते हैं.

कमल सरोवर के जरिए क्षेत्र के लिए पर्यटन की अपार संभावनाएं
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पर्यटन की अपार संभावनाएं, पर विकास अधूरा
गांव का माहौल हर समय भक्ति और आध्यात्म से सराबोर रहता है. ग्रामीणों का कहना है कि कमल सरोवर के जरिए क्षेत्र के लिए पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन अब तक यहां अपेक्षित विकास कार्य नहीं हो पाए हैं. उनका मानना है कि यदि इसे पर्यटन स्थल घोषित कर यहां बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएं, तो यह हाड़ौती क्षेत्र का एक बड़ा धार्मिक और इको-टूरिज्म केंद्र बन सकता है.

लगातार बिना रुके रामायण पाठ किया जाता है
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पर्यटन स्थल घोषित किया जाए
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चुनावी रण में 'कमल सरोवर' का मुद्दा
पंचायत चुनाव नजदीक आते ही ग्रामीणों ने अपना रुख साफ कर दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और नेताओं ने कई बार जायजा लिया, लेकिन सुविधाएं नहीं बढ़ीं. इस बार डूंगरजा के मतदाता उसी उम्मीदवार को अपना समर्थन देंगे, जिसके पास इस धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल के कायाकल्प की ठोस योजना होगी. इसे लेकर ग्रामीणों की मांग है कि इसे आधिकारिक तौर पर पर्यटन स्थल घोषित किया जाए, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाएं विकसित हो सकें.