प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के ईटानगर सब-जोनल ऑफिस ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से जुड़े बड़े कथित घोटाले की जांच के तहत अहम कार्रवाई की. एजेंसी ने राजस्थान के खैरथल-तिजारा स्थित खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में मौजूद लगभग 1 हजार 195 वर्ग गज की अचल औद्योगिक संपत्ति को अस्थायी रूप से अटैच किया है, इस संपत्ति की अनुमानित कीमत करीब 3.30 करोड़ रुपए बताई गई है.
यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 5 (1) के तहत 7 जनवरी 2026 को जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के जरिए मेसर्स प्रिशा एक्जिम और अनमोल जैन के मामले में की गई है.
116 करोड़ का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट बनाया
ईडी ने यह जांच भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी, जो अनुसूचित अपराधों की श्रेणी में आती हैं. जांच के दौरान सामने आया कि मेसर्स श्रीराम एंटरप्राइजेज ने बिना किसी वास्तविक माल की आपूर्ति किए फर्जी इनवॉइस जारी कर लगभग 116 करोड़ रुपए का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट बनाया. यह आईटीसी केवल कागजों पर दिखाए गए लेनदेन के जरिए हासिल किया गया, जिसका वास्तविक कारोबार से कोई संबंध नहीं था.
दिए पते पर मौजूद नहीं थीं कंपनियां
जांच में यह भी सामने आया कि इस फर्जी आईटीसी को कई गैर-मौजूद और शेल कंपनियों के नेटवर्क के माध्यम से व्यवस्थित रूप से लेयरिंग और रूटिंग की गई, इनमें मेसर्स नेमचंद सिंह ट्रेडर्स, मेसर्स योगेश ट्रेडर्स, मेसर्स श्री महालक्ष्मी एंटरप्राइजेज और मेसर्स टेक्नोफैब इंटरनेशनल शामिल हैं. जांच एजेंसी के अनुसार, ये सभी संस्थाएं अपने घोषित पते पर मौजूद नहीं पाई गईं और इन्हें भेजे गए समन भी तामील नहीं हो सके, जिससे इनके फर्जी होने की पुष्टि होती है.
7.39 करोड़ का फर्जी आईटीसी प्राप्त किया
ईडी की जांच में यह भी पाया गया कि मेसर्स टेक्नोफैब इंटरनेशनल ने धोखाधड़ी से आईटीसी का दावा किया और काल्पनिक आईटीसी को आगे ट्रांसफर करने के लिए एक मध्यस्थ की भूमिका निभाई. इस कंपनी को एक गैर-मौजूद संस्था के रूप में चिह्नित किया गया है. जांच के अनुसार, अनमोल जैन द्वारा नियंत्रित मेसर्स प्रिशा एक्जिम ने अंततः इसी काल्पनिक संस्था से बिना किसी वास्तविक माल की आपूर्ति के 7.39 करोड़ रुपए का फर्जी आईटीसी प्राप्त किया और उसका इस्तेमाल किया. इस आईटीसी का उपयोग मनगढ़ंत इनवॉइस और ई-वे बिल के आधार पर जीएसटी देनदारियों के भुगतान के लिए किया गया.
कई शेल कंपनियों में डायवर्ट किया
ईडी की आगे की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि मेसर्स प्रिशा एक्जिम द्वारा कथित सप्लायरों को ट्रांसफर किए गए फंड को देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित कई शेल कंपनियों में डायवर्ट किया गया. इन कंपनियों के पास न तो कोई वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि थी, न ही बुनियादी ढांचा और न ही कोई वास्तविक वाणिज्यिक लेनदेन, इसके बावजूद इनके जरिए भारी टर्नओवर दिखाया गया. ईडी के मुताबिक, यह पूरे नेटवर्क के जरिए अपराध से अर्जित धन की सुनियोजित लेयरिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की ओर इशारा करता है.
आगे और खुलासे होने की संभावना
जांच में यह भी सामने आया कि जिन अचल संपत्तियों को अटैच किया गया है, वे मेसर्स प्रिशा इलेक्ट्रिकल्स के नाम पर दर्ज हैं. यह एक प्रोप्राइटरशिप फर्म है, जिसका पूर्ण स्वामित्व और नियंत्रण अनमोल जैन के पास है. ईडी का मानना है कि इन संपत्तियों का अधिग्रहण भी कथित तौर पर अपराध से अर्जित आय के जरिए किया गया है. मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले समय में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.
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