जयपुर में हाथियों के खान-पान में बदलाव किया गया है. थान में पंखे और कूलर लगाए गए हैं. खाने में खीरा, तरबूज और ठंडी तासीर वाले आहार सत्तू और नारियल का पिलाया जा रहा. हाथियों के नाखून पर आयुर्वेदिक तेल से मालिश हो रही है, जिससे हाथियों के नाखून गर्मी से नहीं चटके. चिकित्सकों की टीम भी लगी है, जो उनके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए है.
हाथी गांव में विशेष इंतजाम
हाथी मालिक विकास समिति के अध्यक्ष बल्लू खान ने बताया कि हाथियों को दिन में तीन बार तालाब में स्नान कराया जा रहा है, जिससे उनके शरीर का तापमान संतुलित रहे. कूलर और पंखे लगाए गए हैं. गर्मी अधिक पड़ने पर कूलरों की संख्या भी बढ़ सकती है.
आयुर्वेदिक तेल से नाखूनों की मालिश
बल्लू खान ने बताया कि एक दिन छोड़कर एक दिन ही हाथी सवारी के लिए भेजा जा रहा है. पशु चिकित्सकों की टीम लगातार हाथियों की सेहत पर नजर बनाए हुए है.

हाथियों के लिए कूलर लगाया गया है.
शाही अनुभव देती आमेर की हाथी सवारी
आमेर महल के वरिष्ठ टूरिस्ट पर्यटक गाइड विनोद कुमार शर्मा ने बताया कि आमेर महल में आज भी राजसी परंपराओं की झलक देखने को मिलती है. हाथी सवारी पर्यटकों को शाही दौर का अनोखा अनुभव कराती है. आमेर की हाथी सवारी सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और शाही अंदाज का जीवंत अनुभव है.
समय में हुआ बदलाव
आमेर महल अधीक्षक राकेश छोलक ने बताया कि हाथी सवारी का समय सुबह 7:00 बजे से 10:30 बजे तक निर्धारित किया गया है. प्रत्येक हाथी को सप्ताह में दो दिन का विश्राम दिया जा रहा है, जिससे उन्हें पर्याप्त आराम मिल सके.
(इनपुट- रोहन शर्मा)
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