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पुलिसकर्मी के आकस्मिक निधन पर परिवार को तुरंत मिलेंगे 3 लाख रुपये, एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी की अनूठी पहल

सवाई माधोपुर एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी ने पुलिस परिवारों के लिए 'अक्षय फंड' की शुरुआत की है. इस अनूठी पहल के तहत किसी पुलिसकर्मी के आकस्मिक निधन पर उनके परिजनों को तुरंत 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी.

पुलिसकर्मी के आकस्मिक निधन पर परिवार को तुरंत मिलेंगे 3 लाख रुपये, एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी की अनूठी पहल
सवाई माधोपुर एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी.

Rajasthan News: राजस्थान में सवाई माधोपुर पुलिस ने संवेदनशीलता की एक नई मिसाल पेश की है. पुलिस अधीक्षक ज्येष्ठा मैत्रेयी के नेतृत्व में शुरू किया गया 'अक्षय फंड' अब जिले के पुलिसकर्मियों के परिवारों के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बन गया है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसी भी अप्रत्याशित संकट के समय पीड़ित परिवार को तुरंत आर्थिक संबल प्रदान करना है.

कांस्टेबल की स्मृति से जन्मी प्रेरणा

यह अनूठी पहल सवाई माधोपुर पुलिस लाइन में तैनात रहे कांस्टेबल कुंजीलाल के आकस्मिक निधन के बाद शुरू हुई. इस दुखद घटना ने पुलिस प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कैसे पीड़ित परिवारों को कागजी औपचारिकताओं में उलझे बिना तत्काल आर्थिक मदद दी जा सके. इसी सोच से 'अक्षय फंड' का जन्म हुआ.

कैसे काम करेगा यह सुरक्षा कवच?

इस फंड की कार्यप्रणाली बेहद सरल और व्यावहारिक है. जिले के लगभग 1400 पुलिसकर्मी स्वेच्छा से अपने एक दिन का वेतन इस फंड में योगदान देंगे. इससे लगभग 16 लाख रुपये का कोष तैयार होगा. योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह आत्मनिर्भर है. एक बार सहायता राशि देने के बाद तब तक दोबारा कटौती नहीं होगी, जब तक फंड की राशि समाप्त न हो जाए. यह चक्र निरंतर चलता रहेगा, जिससे किसी भी कर्मचारी पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा.

संकट में पुलिस परिवार साथ

किसी भी पुलिसकर्मी की आकस्मिक मृत्यु होने पर उसके परिजनों को तत्काल तीन लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी. एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी का मानना है कि वर्दी केवल कानून व्यवस्था का काम नहीं करती, बल्कि वह अपने हर एक सदस्य के परिवार की सुरक्षा की भी जिम्मेदारी लेती है. यह राशि शोकाकुल परिवार को संबल देगी और उन्हें यह अहसास कराएगी कि वे इस कठिन दौर में अकेले नहीं हैं.

पूरे प्रदेश के लिए एक मॉडल

यह पहल केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुलिस बल के मनोबल को भी बढ़ाती है. जब एक जवान को पता होता है कि उसके न रहने पर भी उसका परिवार सुरक्षित हाथों में है, तो वह अधिक निडर होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है. सवाई माधोपुर की यह मानवीय पहल पूरे राजस्थान के पुलिस महकमे के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन सकती है.

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