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कोटा कोचिंग सिटी में छात्रों को खाने की होगी परेशानी, गैस सिलेंडर किल्लत से 1200 मेस प्रभावित

कोटा शहर में करीब 1200 से ज्यादा मेस और 3000 से अधिक हॉस्टल हैं, जहां रोज हजारों छात्र खाना खाते हैं. लेकिन इन दिनों कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत ने मेस संचालकों के सामने बड़ी समस्या खड़ी कर दी है.

कोटा कोचिंग सिटी में छात्रों को खाने की होगी परेशानी, गैस सिलेंडर किल्लत से 1200 मेस प्रभावित
कोटा में छात्रों को खाने की होगी परेशानी

Kota Coaching City: देश की कोचिंग सिटी कोटा में कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत का असर अब सीधे स्टूडेंट्स की थाली तक पहुंच गया है. गैस की सप्लाई बाधित होने और दाम बढ़ने से कई मेस संचालकों को मेस चलाना मुश्किल हो रहा है. ऐसे में कई जगहों पर गैस की जगह तंदूर का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन स्टूडेंट्स का कहना है कि उन्हें तंदूरी रोटी से ज्यादा तवा रोटी पसंद है. कोटा में देशभर से हजारों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं. शहर में करीब 1200 से ज्यादा मेस और 3000 से अधिक हॉस्टल हैं, जहां रोज हजारों छात्र खाना खाते हैं. लेकिन इन दिनों कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत ने मेस संचालकों के सामने बड़ी समस्या खड़ी कर दी है.

कमर्शियल गैस सिलेंडर पर प्रतिबंध, सप्लाई कम होने ओर ब्लैक में कीमतें बढ़ने के कारण कई मेस संचालकों को खाना बनाने के लिए तंदूर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है. कुछ जगहों पर स्टूडेंट्स को अस्थायी तौर पर फास्ट फूड भी दिया जा रहा है. हालांकि छात्रों का कहना है कि तंदूरी रोटी के बजाय तवा रोटी ज्यादा हल्की और पचने में आसान होती है.

बिना गैस सिलेंडर नियमित रूप से मेस चलाना मुश्किल

कोचिंग स्टूडेंट हल्का खाना ज्यादा पसंद करते हैं तंदूरी रोटी भारी होती है, पढ़ाई के दौरान तवा रोटी ज्यादा बेहतर रहती है. क्योंकि यह डाइजेशन के लिए भी अच्छी होती है. ऐसा स्टूडेंटस का कहना है वही मेस संचालकों का कहना है कि बिना गैस सिलेंडर के नियमित रूप से मेस चलाना बेहद मुश्किल हो गया है. पहले ही कमर्शियल सिलेंडर के दाम काफी बढ़ चुके हैं और अब  सिलेंडर मिलना भी मुश्किल हो रहा है. अगर गैस सिलेंडर की सप्लाई जल्दी सामान्य नहीं हुई तो हमें कोयले और लकड़ी की भट्टियों का इंतजाम करना पड़ेगा, क्योंकि हजारों स्टूडेंट्स के लिए रोज खाना बनाना हमारी जिम्मेदारी है.

जल्द समाधान नहीं हुआ तो फिर कोचिंग व्यवस्था होगी ठप

मेस संचालकों का कहना है कि अगर यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो इसका असर न सिर्फ छात्रों की दिनचर्या पर पड़ेगा बल्कि मेस और हॉस्टल संचालकों की लागत भी काफी बढ़ जाएगी. कोटा में पढ़ने आए हजारों छात्रों के लिए मेस का खाना रोजमर्रा की जरूरत है. ऐसे में गैस सिलेंडर की किल्लत का जल्द समाधान नहीं हुआ तो इसका असर सीधे छात्रों की सुविधा और शहर की कोचिंग व्यवस्था पर भी पड़ सकता है.

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