राजस्थान में हिंदुस्तान स्काउट एंड गाइड मामले ने अब राजनीतिक रंग पकड़ लिया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर आमने-सामने आ गए हैं. दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. डोटासरा के ट्वीट के बाद दिलावर ने उन्हें मानसिक बीमार बताया तो डोटासरा ने पैसे के हैदर के मामले में जांच की मांग की है. डोटासरा ने कहा कि बिना जांच किए क्लीन चिट दी तो वे और सबूत देंगे. पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर आरोप लगाए. डोटासरा ने कहा कि ईमानदारी की बातें करने वाले मंत्री के कार्यकाल में हिंदुस्तान स्काउट एंड गाइड संस्था में करोड़ों रुपए की अनियमितताओं का मामला सामने आया है.
सचिव नरेन्द्र औदिच्य पर पैसे के हेरफेर का आरोप
गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया के बाद मीडिया के सामने भी पैसे के ट्रांजेक्शन के सबूतों के साथ अपनी बात रखी और हिंदुस्तान स्काउट गाइड के सचिव नरेन्द्र औदिच्य पर पैसे के हेरफेर और अनियमित लेनदेन के आरोप लगाए. उन्होंने आरोप लगाया कि संस्था में गड़बड़ियां, अवैध वसूली, निजी खातों में रकम ट्रांसफर करने जैसे मामले उजागर हो रहे हैं. डोटासरा ने सवाल उठाया कि जब मदन दिलावर खुद संस्था के अध्यक्ष हैं, तो फिर इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितताएं किसके संरक्षण में हुईं?
डोटासरा ने यह भी कहा कि शिविरों के नाम पर अधिक पैसे वसूले गए, लेकिन वह संस्था के खातों में जमा नहीं हुए. उन्होंने भर्ती के नाम पर पैसे लेने और अधिकारियों द्वारा फर्जी दस्तखत कर राशि वसूलने के आरोप भी लगाए. साथ ही उन्होंने सवाल किया कि मंत्री के पीए बंशीवाल स्काउट के कैंपों में क्यों जाते हैं और उनकी वहां क्या भूमिका रहती है?
मदन दिलावर ने डोटासरा के आरोपों को बताया निराधार
उधर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने डोटासरा के आरोपों को निराधार बताया. दिलावर ने कहा कि डोटासरा उनके मित्र हैं, लेकिन वह मानसिक संतुलन खो बैठे हैं. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से डोटासरा का इलाज कराने तक की बात कह दी. लेकिन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि जैसे ही जांच की बात उठाई गई, उन्हें मानसिक रूप से असंतुलित बताया जाने लगा. उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाएंगे. डोटासरा ने यह भी कहा कि जब उन पर पेपर लीक के आरोप लगे थे, तब उन्होंने खुद जांच की मांग की थी, लेकिन अब मंत्री जांच से क्यों बच रहे हैं.
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