Hanuman Beniwal: हनुमान बेनीवाल ने मंगलवार को लोक सभा में किसानों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाते हुए संतरा, किन्नू जैसी बागवानी फसलों तथा जीरा और इसबगोल जैसी नकदी फसलों पर आने वाली अधिक लागत के मुकाबले कम मिल रही कृषि इनपुट सहायता का विषय प्रश्न के जरिए उठाया. सांसद बेनीवाल ने सरकार से पूछा कि इन फसलों की खेती में गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, उर्वरक, सिंचाई व्यवस्था और अन्य संसाधनों पर किसानों को अधिक खर्च करना पड़ता है, लेकिन प्राकृतिक आपदा की स्थिति में मिलने वाली इनपुट सहायता काफी कम है.
उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या सरकार स्टेट डिसास्टर रिलीफ फंड (SDRF) के नियमों में संशोधन कर इन फसलों के नुकसान पर मिलने वाली कृषि इनपुट सहायता की सीमा 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर कम से कम 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर करने पर विचार कर रही है.
फसलों के लिए लागत मानदंड और सहायता में बढ़ोतरी
केंद्र सरकार की तरफ से कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री ने लिखित उत्तर में बताया कि बागवानी क्षेत्र में बढ़ती लागत को ध्यान में रखते हुए मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर के दिशा-निर्देशों में साल 2025 में संशोधन किया गया है. इसके तहत संतरा-किन्नू, जीरा तथा इसबगोल जैसी फसलों के लिए लागत मानदंड और सहायता में बढ़ोतरी की गई है.
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राहत प्रदान करने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है. SDRF और नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (NDRF) के तहत दी जाने वाली राशि राहत के रूप में होती है, न कि मुआवजे के रूप में.
किसान बड़ी संख्या में जीरा और अन्य नकदी फसलों की खेती करते हैं
सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि राजस्थान के कई जिलों में किसान बड़ी संख्या में जीरा और अन्य नकदी फसलों की खेती करते हैं. इसलिए किसानों को अधिक आर्थिक सुरक्षा देने के लिए केंद्र सरकार को इनपुट सहायता की सीमा बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े इस मुद्दे को वे आगे भी संसद और सरकार के सामने मजबूती से उठाते रहेंगे.