व्यक्ति की अगर इच्छाशक्ति प्रबल हो तो भगवान की बनाई किस्मत को भी बदल सकता है. बस जरूरत है अपने अंदर छिपे हुनर को पहचाने की. कुछ ऐसा ही कर दिखाया बीकानेर की एक ऐसी महिला ने, जिसकी खुद की जिंदगी अधंकार से भरी है. लेकिन आज वो हजारों बालिकाओं में ज्ञान का प्रकाश फैलाकर उनके भविष्य के अंधकार को दूर कर रही हैं.
सुनीता जन्म से ही नेत्रहीन हैं
सुनीता मेहता जन्म से ही नेत्रहीन हैं. वो देख नहीं सकती हैं. सुनीता बीकानेर संभाग के सबसे बड़े बालिका महाविधालय महारानी सुदर्शना में पिछले चार साल से अंग्रेजी की लेक्चरर हैं. जब यह छात्राओं को पढ़ाती हैं, तो कभी भी ऐसा नहीं लगता कि वो नेत्रहीन हैं. छात्राएं भी पूरी गंभीरता से उनसे अंग्रेजी सीखती हैं.
सुनीता बच्चों को एक विशेष डिवाइस ब्रेल नोट टच प्लस की मदद से पढ़ाती हैं. डिवाइस पर अंकित शब्दों पर अपनी अंगुलियों की सहायता से पढ़ने के बाद वो धाराप्रवाह उसका उच्चारण करती हैं. साथ ही छात्राओं के प्रत्येक प्रश्नों का उत्तर भी देती हैं.
सुनीता महाविद्यालय में हैं टीचर
सुनीता ने बताया कि वे जन्म से ही नेत्रहीन हैं. परिवार वाले उनका बहुत इलाज कराया, जब मालूम हुआ कि उनका इलाज नहीं हो सकता तो परिवार वालों ने जोधपुर के नेत्रहीन विद्यालय में उनका एडमिशन करा दिया. परिवार को सहयोग और उनकी खुद की जिद ने आज उनको इस मुकाम पर पहुंचा दिया. आज वो BA से लेकर PG तक की छात्राओं को अंग्रेजी पढ़ाती हैं.सुनीता का चयन 2011 राजकीय सेवा में चयन हुआ. स्कूल से अध्यापक से शुरू हुआ सफर आज महाविधालय तक जारी है.
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