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IAS पति-पत्नी आशीष मोदी और भारती दीक्षित का तलाक, कोर्ट के आदेश पर अब हुआ खुलासा

भारती दीक्षित ने कोर्ट में कहा कि उन्होंने नाबालिग बेटी, सामाजिक स्थिति और पद की गरिमा को देखते हुए समझौता किया है. हालांकि, सहआरोपी सुरेंद्र विश्नोई और आशीष शर्मा से समझौते के लिए वे तैयार नहीं हैं.

IAS पति-पत्नी आशीष मोदी और भारती दीक्षित का तलाक, कोर्ट के आदेश पर अब हुआ खुलासा
आशीष मोदी और भारती दीक्षित का तलाक

Ashish Modi and Bharti Dixit Divorce: राजस्थान के IAS ऑफिसर आशीष मोदी और IAS ऑफिसर भारती दीक्षित का विवाद नवंबर 2025 में सामने आया था. जब IAS ऑफिसर भारती दीक्षित ने अपने पति आशीष मोदी के खिलाफ केस दर्ज करवाया था. इस मामले के बाद दोनों का घरेलू विवाद सामने आया था. लेकिन अब दोनों का तलाक हो गया है. बताया जा रहा है कि दोनों ने आपसी सहमति से फैमली कोर्ट में तलाक की अर्जी दी थी, जिसके बाद 15 दिसंबर 2025 को ही स्वीकार कर लिया गया था. लेकिन इसका खुलासा अब हुआ है.

कोर्ट ने FIR रद्द कर दी

आईएएस अधिकारी आशीष मोदी और भारती दीक्षित के तलाक का खुलासा राजस्थान हाईकोर्ट के हालिया आदेश से हुआ. भारती दीक्षित ने नवंबर 2025 में आशीष मोदी के खिलाफ एसएमएस थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी. मोदी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर रद्द करने की मांग की, जिसमें बताया कि दोनों के बीच समझौता हो गया है और तलाक भी अंतिम हो चुका है. कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए एफआईआर रद्द कर दी.

पद की गरिमा को देखते हुए किया समझौता- भारती दीक्षित

भारती दीक्षित ने कोर्ट में कहा कि उन्होंने नाबालिग बेटी, सामाजिक स्थिति और पद की गरिमा को देखते हुए समझौता किया है. हालांकि, सहआरोपी सुरेंद्र विश्नोई और आशीष शर्मा से समझौते के लिए वे तैयार नहीं हैं. उनका आरोप है कि इन दोनों ने मोदी की मदद की, उन्हें धमकाया, अपहरण किया और अवैध हिरासत में रखा. कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता यह नहीं कह सकती कि समझौता केवल पति तक सीमित है. सहआरोपियों ने सिर्फ पति की सहायता की थी, इसलिए आंशिक कार्रवाई न्याय के खिलाफ होगी और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा.

अदालत ने टिप्पणी की कि पति-पत्नी दोनों आईएएस अधिकारी हैं. ऐसे उच्च पदों पर बैठे लोगों से परिपक्वता, विवेक और संवेदनशीलता की उम्मीद की जाती है. वैवाहिक विवादों का समाधान संयम से होना चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ. फिर भी, दोनों पक्षों के सौहार्दपूर्ण समझौते के आधार पर एसएमएस थाने की एफआईआर और इससे जुड़ी सभी कार्रवाइयां रद्द कर दी जाती हैं.

क्या था पुराना केस

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