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This Article is From Mar 19, 2026

500 साल पुराना शिला माता मंदिर... बंगाल से मानसिंह प्रथम लाए थे मूर्ति, नवरात्र पर लगी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़

राजस्थान में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत के साथ जयपुर के आमेर स्थित शिला माता मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है. 500 साल पुराने इस मंदिर में पहले ही दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे. रिपोर्ट- रोहन शर्मा

500 साल पुराना शिला माता मंदिर... बंगाल से मानसिंह प्रथम लाए थे मूर्ति, नवरात्र पर लगी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़
आमेर स्थित शिला माता मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है.

Rajasthan News: चैत्र नवरात्रि के आगमन के साथ जयपुर के आमेर किला स्थित शिला माता मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली. सुबह 7:05 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ घट स्थापना हुई. 8:15 बजे जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा. श्रद्धालु ध्वज लेकर और दंडवत करते हुए माता के दर्शन करने पहुंचे.

500 साल पुराना इतिहास और बंगाल से जुड़ाव

मंदिर का इतिहास करीब 500 वर्ष पुराना माना जाता है. कछवाहा वंश के वीर शासक राजा मानसिंह प्रथम बंगाल के जसोर से इस प्रतिमा को आमेर लाए थे. मान्यता है कि यह प्रतिमा पहले पत्थर के रूप में थी, जिसे बाद में देवी के स्वरूप में तराशा गया. यहां आज भी पूजा बंगाली परंपरा से होती है और माता को शिला देवी, काली और जसरेश्वरी नामों से भी जाना जाता है.

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नवरात्र में लगता है विशाल धार्मिक मेला

नवरात्र के नौ दिनों में आमेर आस्था का केंद्र बन जाता है. दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. मंदिर में भव्य झांकियां सजती हैं और माता का विशेष श्रृंगार किया जाता है. पूर्व राजपरिवार की ओर से हर वर्ष विशेष पोशाक अर्पित की जाती है.

पूजा और दर्शन का पूरा कार्यक्रम

मंदिर में दर्शन सुबह 6 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 8:30 बजे तक होते हैं.दैनिक अनुष्ठानों में बाल भोग, प्रातः आरती, संध्या आरती और शयन आरती शामिल हैं. विशेष कार्यक्रमों में छठे दिन मेला, 25 मार्च को निशा पूजन, 26 मार्च को पूर्णाहुति और 28 मार्च को नवरात्र उत्थापन होगा.

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आस्था का अटूट केंद्र बना मंदिर

शिला माता मंदिर जयपुरवासियों की गहरी आस्था का केंद्र है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है. मंदिर का चांदी का द्वार और गर्भगृह की भव्यता श्रद्धालुओं को विशेष आकर्षित करती है.

शक्ति उपासना का प्रमुख स्थल

इतिहास और परंपराओं से जुड़ा यह मंदिर आज भी शक्ति उपासना का बड़ा केंद्र बना हुआ है. नवरात्रि के दौरान यहां उमड़ने वाली भीड़ सदियों पुरानी आस्था की मजबूती को दर्शाती है.

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