जैसलमेर. वर्ल्ड फेमस डेजर्ट फेस्टिवल के तहत सम-लखमणा के मख्मली धोरों पर आयोजित भव्य सांस्कृतिक संध्या ने थार की रेत को सुर, ताल और रंगों से सराबोर कर दिया. लोक संगीत, पारंपरिक नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. बॉलीवुड सिंगर राज बर्मन की रोमांटिक प्रस्तुतियों पर पर्यटक झूम उठे. एंड पार्टी द्वारा भावपूर्ण गुरु वंदना "वारी जाऊं रे … सतगुरु आंगन आया…" से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया. इसके बाद लोक कलाकार रमेश और पारस ने "बना रे बागा में झूला डालिया…" पर मनोहारी रिंग डांस की परफॉरमेंस देकर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी.
प्रसिद्ध लोक गायक मोती खान ने "केसरिया बालम आओ जी पधारो म्हारे देश…एवं घूमर गीत "यहां-वहां सारा जहां देख लिया…" जैसी प्रस्तुतियों से राजस्थानी लोक संगीत की आत्मा को जीवंत कर दिया. वहीं जोधपुर की संगीता सपेरा द्वारा प्रस्तुत कालबेलिया नृत्य "कालिया कूद पड़ियों बेरा में…" पर दर्शकों ने तालियों की गूंज से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया.

इसके बाद जलाल खान और अख्तर खान (कनोई) ने "लाली मेरे लाल की…", "धमा-धम मस्त कलंदर…", "मुझसे नैना मिलाइ दे…", "राम कहूं की रामदेव…", "मेरा हेलो सुनो नी रामापीर…एवं "बालम जी मारा जीर मर, बरसे मेघ…" जैसी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया.

गायक राज बर्मन ने "तेरे इश्क में…", "तू ही तू है खुदा…", "हमें कितनी शिद्दत से…", "तुम मिले दिल खिले…", "मैंने तुमको चुना है…", "चलिया तेरी ओर…", एवं “हवाएं-हवाएं ले जाएं तुझे कहां…" जैसे लोकप्रिय गानों की प्रस्तुति देकर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया.

देर रात तक चली इस संगीत संध्या का दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया. लखमण के धोरों पर सजी यह सुर-ताल की महफिल मरु महोत्सव 2026 की यादगार शामों में शुमार हो गई. लोक संगीत, नृत्य और बॉलीवुड की मधुर आवाज़ के इस संगम ने न सिर्फ देशी-विदेशी पर्यटकों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि जैसलमेर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया.
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