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करौली में बस हड़ताल खत्म, बंद कमरे में 1 घंटा चली मीटिंग; जानें किन 3 शर्तों पर मानी बस यूनियन?

Karauli Bus Strike News: करौली में दो दिनों से जारी निजी बसों की हड़ताल आखिरकार खत्म हो गई है. DTO धारा सिंह और बस संचालकों के बीच हुई एक घंटे की बातचीत के बाद 150 से अधिक बसें सड़कों पर लौट आई हैं. जानें किन शर्तों पर बनी बात.

करौली में बस हड़ताल खत्म, बंद कमरे में 1 घंटा चली मीटिंग; जानें किन 3 शर्तों पर मानी बस यूनियन?
करौली में दो दिनों से जारी निजी बसों की हड़ताल आखिरकार खत्म हो गई है.
NDTV Reporter

Rajasthan News: राजस्थान के करौली जिले में पिछले 48 घंटों से मचा परिवहन का हाहाकार शुक्रवार को थम गया. आरटीओ की कड़ी कार्रवाई और भारी जुर्माने के खिलाफ अड़े निजी बस संचालकों और प्रशासन के बीच जमी बर्फ आखिरकार पिघल गई. जिला परिवहन अधिकारी (DTO) धारा सिंह और ट्रैफिक इंचार्ज रामदीन शर्मा के साथ बस यूनियन पदाधिकारियों की करीब 1 घंटे तक बंद कमरे में मैराथन वार्ता चली. इस 'पावर मीटिंग' के बाद बस ऑपरेटरों ने अपनी हड़ताल वापस लेने और बसों का संचालन तुरंत बहाल करने का बड़ा फैसला लिया. इसके साथ ही बस स्टैंड पर पसरा सन्नाटा टूट गया और यात्रियों के चेहरे पर राहत लौट आई.

150 बसों के पहिए थमने से करौली-जयपुर रूट पर मचा था हाहाकार

इस हड़ताल का असर कितना गहरा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले भर की 150 से अधिक निजी बसें दो दिनों तक स्टैंड पर खड़ी रहीं. करौली से संचालित होने वाले 11 प्रमुख रूटों की 80 बसें बंद होने से पूरा सिस्टम चरमरा गया था. सबसे ज्यादा मार करौली-जयपुर रूट पर पड़ी, जहां हजारों यात्री घंटों तक बसों का इंतजार करते देखे गए. स्थिति को बिगड़ते देख रोडवेज प्रशासन ने मोर्चा संभाला और जयपुर मार्ग पर 4 अतिरिक्त बसें उतारीं. साथ ही विद्याधर नगर, अलवर और भरतपुर डिपो से भी बैकअप मंगवाया गया, तब जाकर स्थिति आंशिक रूप से संभली.

कैलादेवी के श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की बढ़ी मुश्किलें, अब मिली राहत

हड़ताल की सबसे ज्यादा मार उन श्रद्धालुओं पर पड़ी जो माता कैलादेवी के दर्शन करने पहुंचे थे. ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालय आने वाले लोगों को भी डग्गामार वाहनों और महंगे वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा. बस स्टैंड पर यात्रियों की भारी भीड़ और अफरा-तफरी का माहौल शुक्रवार शाम तक सामान्य होने लगा. बस यूनियन ने साफ कर दिया है कि उनकी मांगें जायज हैं. यूनियन ने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर AITP टैक्स कम करने, सस्पेंड की गई आरसी (RC) बहाल करने और जिला मुख्यालय पर ही फिटनेस सुविधा शुरू करने की मांग मजबूती से उठाई है.

प्रशासन का रुख: 'यात्री सुविधा सर्वोपरि, नियमों में होगा समाधान'

बैठक के बाद DTO धारा सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुविधा है. उन्होंने कहा, 'बस संचालकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना गया है. टैक्स और जुर्माने से जुड़े मुद्दों पर नियमानुसार समाधान के प्रयास किए जाएंगे.' वहीं बस मालिकों का कहना है कि वे भी जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन भारी आर्थिक बोझ के कारण उनके सामने संचालन का संकट खड़ा हो गया था. अब प्रशासन के आश्वासन के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि करौली की सड़कों पर परिवहन व्यवस्था फिर से सुचारू रूप से दौड़ने लगेगी.

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