Rajasthan News: बीकानेर में खेजड़ी वृक्षों की कटाई के विरोध में संत समाज का आमरण अनशन लगातार जारी है. महापड़ाव स्थल पर संत समाज के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष अनशन पर बैठे हैं. सरकार से लगातार खेजड़ी संरक्षण की मांग की जा रही है. अनशन पर बैठे लोगों का कहना है कि जबतक उनकी मांग पूरी नहीं तो उनका आंदोलन रुकने वाला नहीं है. इस बीच बुधवार को 10 से अधिक अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ गई. अनशन पर बैठे संतों ने सरकार को एक दिन का अल्टीमेटम दिया है.
राजनीतिक दलों से की अपील
अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवराज बिश्नोई ने खेजड़ी को आस्था, धर्म और पर्यावरण से जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से संवाद कर समाधान की मांग की है. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि यदि संतों की मांगें सही हैं तो विधानसभा में समर्थन देकर कानून प्रक्रिया शुरू करें. इसे बिश्नोई समाज का पर्यावरण बचाने का अंतिम प्रयास बताया गया.
संत समाज ने दिया सरकार को अल्टीमेटम
धरना स्थल पर सैकड़ों लोग अन्न-जल त्याग कर अनशन पर बैठे हैं, जिनमें साधु - संत, महिलाएं और पुरुष भी शामिल हैं. आज संत समाज ने सरकार को एक दिन का अल्टीमेटम दिया और कहा कि खेजड़ी के लिए वे प्राण त्यागने को भी तैयार हैं. अनशन के दौरान तबीयत बिगड़ने पर लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया. वहीं, स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम अनशन स्थल पर तैनात है.
वसुंधरा का खेजड़ी बचाओ आंदोलन को समर्थन
सीएमएचओ डॉ. पुखराज साध व डॉ. सुरेंद्र बराम के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम लगातार मेडिकल जांच कर रही है. फिलहाल धरना स्थल पर बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी मौजूद हैं, लेकिन अब तक सरकार से कोई वार्ता नहीं हो सकी है. अनशन बैठे लोगों ने जल्द से जल्द ट्री एक्ट कानून लागू करने की मांग की है. बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत खेजड़ी बचाओ आंदोलन का समर्थन कर चुके हैं. मंगलवार को वसुंधरा ने खेजड़ी बचाओ आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए सोशल मीडिया पर खेजड़ी के पेड़ की पूजा करते हुए अपनी एक तस्वीर शेयर की.
वसुंधरा ने कहा कि खेजड़ी कोई साधारण पेड़ नहीं है, हमारे लिए यह एक पवित्र पेड़ है. यह हमारी आस्था और भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है. हमारी परंपरा में खेजड़ी की पूजा की जाती है. मैं खुद भी खेजड़ी के पेड़ की पूजा करती हूं. जब हम किसी देवता की पूजा करते हैं, तो उसकी रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी बन जाती है. राजनीति से ऊपर उठकर हमें इसके संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए. इसे बचाया जाना चाहिए.
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