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This Article is From Mar 27, 2026

कोटा मंडी में ₹2700 के भाव पर गेहूं बेचने से पहले जान लें ये 3 नए नियम, वरना अटक जाएगा टोकन और भुगतान!

कोटा की भामाशाह मंडी में गेहूं की बंपर आवक के बीच ₹2700 का भाव तो मिल रहा है, लेकिन टोकन, बायोमेट्रिक और गिरदावरी की उलझन ने किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है. ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर की सख्ती के बाद अब क्या बदलेंगे नियम? अपनी उपज मंडी ले जाने से पहले यह ग्राउंड रिपोर्ट और समाधान जरूर पढ़ें...

कोटा मंडी में ₹2700 के भाव पर गेहूं बेचने से पहले जान लें ये 3 नए नियम, वरना अटक जाएगा टोकन और भुगतान!
कोटा मंडी ग्राउंड रिपोर्ट: बंपर आवक के बीच सिस्टम की उलझन, किसान ऐसे बचाएं अपना हक!
NDTV Reporter

Kota News: राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र के अन्नदाताओं के लिए इन दिनों कोटा की भामाशाह अनाज मंडी उम्मीद और परेशानी दोनों का केंद्र बनी हुई है. सरकार की ओर से एफसीआई (FCI) द्वारा 2700 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) की दर से गेहूं की खरीद की जा रही है, जो बाजार भाव से करीब 400 रुपये ज्यादा है. लेकिन, हमारे रिपोर्टर शाकिर अली की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, इस बेहतर कीमत का लाभ लेने के लिए किसानों को 'सिस्टम के कांटों' से गुजरना पड़ रहा है.

वो 3 बड़ी रुकावटें, जो आपका काम अटका सकती हैं:-

1. टोकन और बायोमेट्रिक का 'चक्कर'

सबसे बड़ी समस्या बायोमेट्रिक स्लॉट बुकिंग को लेकर आ रही है. किसानों का आरोप है कि स्लॉट बुक करने के बाद भी समय पर टोकन नहीं मिल रहा. कई किसान चिलचिलाती धूप में घंटों कतार में खड़े रहने को मजबूर हैं. इसीलिए किसानों को सलाह है कि वे मंडी रवाना होने से पहले अपना स्लॉट स्टेटस ऑनलाइन जरूर चेक कर लें.

2. गिरदावरी और मात्रा का अंतर

कई किसानों के साथ ऐसा हो रहा है कि उनके पास गेहूं ज्यादा है, लेकिन गिरदावरी (Girdawari) में दर्ज रकबा कम होने की वजह से एफसीआई पूरा गेहूं नहीं खरीद रहा. इसके अलावा, टोकन पर दर्ज वजन और असल वजन में अंतर आने से भी खरीद प्रक्रिया रुक रही है.

3. पेमेंट और बोनस की देरी

सरकार ने 24 घंटे में भुगतान का वादा किया था, लेकिन हकीकत में कई किसानों का पैसा हफ्तों से अटका है. सबसे बड़ी आपत्ति बोनस राशि को लेकर है. किसानों की मांग है कि बोनस का पैसा भी मुख्य भुगतान के साथ ही खाते में आए. साथ ही, लीज पर खेती करने वालों के लिए पेमेंट लेना बड़ी चुनौती बन गया है क्योंकि टोकन जमीन मालिक के नाम जारी हो रहा है.

मंत्री की सख्ती

मामले की गंभीरता को देखते हुए ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने अधिकारियों के साथ आपात बैठक की है. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि खरीद प्रक्रिया को 'किसान-हितैषी' बनाया जाए और टोकन से लेकर पेमेंट तक की हर बाधा को तुरंत दूर किया जाए.

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