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5 साल से जेल में बंद सरपंच के कातिल ने जमानत के लिए बनवाया फर्जी डॉक्टरी पुर्जा, अब हुई बड़ी कार्रवाई

जांच में पाया गया कि आरोपी राजेश ने पूरी तरह फर्जीवाड़ा किया है. डॉक्टर की पर्ची फर्जी बनवा ली ओर विजेंद्र की पत्नी से फर्जी इलाज के बारे में लिखवा कर न्यायालय में पेश कर दिया जिस पर पुलिस ने आरोपी राजेश को गिरफ्तार कर लिया.

5 साल से जेल में बंद सरपंच के कातिल ने जमानत के लिए बनवाया फर्जी डॉक्टरी पुर्जा, अब हुई बड़ी कार्रवाई
आरोपी गिरफ्तार.

Alwar News: राजस्थान के अलवर जिले में जेल में बंद हत्यारोपी ने जमानत के लिए पत्नी का फर्जी डॉक्टरी पुर्जा बनवा लिया. कोर्ट ने पत्नी की हालत देखते हुए आरोपी को जमानत तो दे दी लेकिन बाद में जब वो इलाज के अन्य दस्तावेज नहीं पेश कर सका तो कोर्ट ने पुलिस को मामले की जांच के आदेश दे दिए. पुलिस की जांच में यह पता चला कि आरोपी की पत्नी का कोई इलाज नहीं हुआ था. आरोपी ने जेल से बाहर निकलने के लिए फर्जी डॉक्टरी पुर्जा कोर्ट में पेश किए. सच्चाई सामने आने के बाद कोर्ट ने फर्जीवाड़े में शामिल आरोपी के साथी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया. 

2019 में हुई थी सरपंच की हत्या, तभी से जेल में आरोपी

दरअसल अलवर कोतवाली थाना पुलिस ने न्यायालय से जमानत लेने के लिए डॉक्टर के फर्जी कागजात लगाने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. अलवर शहर कोतवाली थाना प्रभारी नरेश शर्मा ने बताया कि मुंडावर थाना क्षेत्र के अहीर भगोला गांव के 2019 में सरपंच की हत्या के मामले में आरोपी विजेंद्र ओर जितेंद्र को गिरफ्तार किया था तभी से ही वह जेल में बंद थे.

पत्नी के ऑपरेशन का फर्जी डॉक्टरी पुर्जा कोर्ट में किया पेश

इसके बाद विजेंद्र ने अपने साथी राजेश से  जमानत लगाने की गुहार की . इसके लिए अदालत ने आरोपी विजेंद्र ने अंतरिम बेल के लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र लगवाया और कहा कि उसकी पत्नी की तबियत खराब है और उसके बच्चेदानी में गांठ है और ऑपरेशन कराना है . उसके बाद संबंधित  न्यायालय ने उससे कहा कि  पत्नी का ऑपरेशन है तो डॉक्टर द्वारा दी गई तारीख का सबूत लाओ.

डॉक्टरी पुर्जा पर कोर्ट ने दे दी अंतरिम बेल

उसके बाद आरोपी विजेंद्र ने अपने साथी राजेश को को बोला तो  राजेश ने फर्जी डॉक्टर की पर्ची  तैयार की जिस पर लिखवा दिया कि क्रिटिकल कंडीशन है और ऑपरेशन डेट 22 जनवरी दर्शा दी. इस पर्ची को न्यायालय में लगा दिया. इस पर्ची पर विश्वास कर  न्यायालय ने विजेंद्र को दस दिन की अंतरिम बेल दे दी गई  और उसे आदेश दिया कि अंतरिम बेल खत्म होने पर पत्नी के इलाज के दस्तावेज लेकर साथ आना. 

जमानत के बाद दस्तावेज लेकर नहीं आया आरोपी

बेल के बाद जब वह वापस आया तो आरोपी दस्तावेज लेकर नहीं गया. इसके बाद कोर्ट ने जांच के आदेश दिए. उसकी पत्नि का ऑपरेशन हुआ है या नहीं उसके बाद डीएसपी ने जांच की तो डॉक्टरों ने कहा कि पर्ची पर कोई इलाज के बारे में टिप्पणी नहीं लिखी .उसके बाद न्यायालय की तरफ से मुलजिमों के खिलाफ धोखाधडी का मामला दर्ज कराया गया.

जांच में पाया  गया कि आरोपी राजेश ने पूरी तरह फर्जी वाडा किया है. डॉक्टर की पर्ची फर्जी बनवा ली ओर विजेंद्र की पत्नी से फर्जी इलाज के बारे में लिखवा कर न्यायालय में पेश कर दिया जिस पर पुलिस ने आरोपी राजेश को फर्जी वाडा और धोखाधड़ी में गिरफ्तार किया है.

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