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पांचना बांध: 360 गांवों ने सरकार को दिया 15 दिन का अल्टीमेटम, मांगे नहीं मानी तो होगा रेल रोको आंदोलन

करौली के हिंडौन में गम्भीर नदी के पुनर्जीवन और पांचना बांध से नियमित पानी छोड़ने की मांग को लेकर 360 गांवों के हजारों किसान महापंचायत में एकजुट हुए. सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है.

पांचना बांध: 360 गांवों ने सरकार को दिया 15 दिन का अल्टीमेटम, मांगे नहीं मानी तो होगा रेल रोको आंदोलन
करौली में 360 गांवों के हजारों किसान महापंचायत में एकजुट हुए.

Rajasthan News: राजस्थान के करौली और भरतपुर जिले के किसानों ने अपने हक के पानी के लिए एक बड़ा बिगुल फूंक दिया है. गुरुवार को देवलेन मोड़ पर हुई एक विशाल महापंचायत में 360 गांवों के किसान, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और जनप्रतिनिधि एकजुट हो गए. गम्भीर नदी में पानी की कमी और पांचना बांध से पानी नहीं छोड़े जाने के कारण क्षेत्र के लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर उतर आया है.

महापंचायत में उमड़ा जनसैलाब 

महापंचायत में स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब किसानों ने जिला कलक्टर को मौके पर बुलाने की मांग की. निर्धारित समय में कलक्टर के न आने पर आंदोलनकारियों ने आक्रोशित होकर पांचना बांध की ओर कूच करने और स्वयं बांध के गेट खोलने तक की चेतावनी दे दी. माहौल की गंभीरता को भांपते हुए जिला प्रभारी मंत्री जवाहर सिंह बेढम और करौली विधायक दर्शन सिंह गुर्जर मौके पर पहुंचे, जिसके बाद वार्ता के माध्यम से स्थिति को संभाला गया.

सरकार को 15 दिन का समय

किसानों ने अपनी सात सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम प्रभारी मंत्री को सौंपा है. आंदोलन समिति ने सरकार को स्पष्ट रूप से 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है. यदि तय समय सीमा के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो क्षेत्र में बड़ा जन आंदोलन और रेल रोको जैसा कदम उठाया जाएगा.

प्रमुख मांगें जो बनी आंदोलन का आधार

1. पांचना बांध जल वितरण समिति की बैठकों में गम्भीर नदी जल समिति को भी शामिल किया जाए.
2. गम्भीर नदी को राज्य सरकार की नदी पुनर्जीवित योजना में शामिल किया जाए.
3. गम्भीर नदी जल समिति के प्रतिनिधियों की मुख्यमंत्री महोदय से एक सप्ताह के भीतर बैठक करवाई जाए.
4. पांचना बांध से पानी छोड़े जाने पर सबसे पहले गम्भीर नदी में पर्याप्त पानी छोड़ा जाए, ताकि नदी का प्राकृतिक बहाव बना रहे और भूजल स्तर सुधरे.
5. करौली से भरतपुर तक गम्भीर नदी क्षेत्र को कमांड एरिया घोषित कर उसका जल अधिकार सुनिश्चित किया जाए.
6. गम्भीर नदी में बने एनीकटों और जल संरचनाओं को ध्यान में रखते हुए नियमित रूप से आवश्यकता अनुसार पानी छोड़े जाने की स्थायी व्यवस्था की जाए.
7. यदि गम्भीर नदी में पानी छोड़े बिना केवल नहरों और अन्य क्षेत्रों में पानी दिया जाता है तो जन आंदोलन एवं रेल रोको आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी.

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

महापंचायत की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पहले से ही पूरी तरह सतर्क था. पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल के निर्देशन में भारी पुलिस बल और आरएसी की दो बटालियन तैनात की गई थीं. प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है ताकि कानून व्यवस्था न बिगड़े. फिलहाल किसान अब सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उनका रुख यह स्पष्ट कर रहा है कि वे अब अपने जल अधिकारों के लिए किसी भी स्तर तक जाने के लिए तैयार हैं.

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