राजस्थान के फलोदी से महज 17 किलोमीटर दूर एनएच-15 पर बसे जोड़ गांव और हिंडालगोल में अनूठी परंपरा कायम है. यहां के ज्यादातर घरों में आज तक टीवी नहीं लगाया गया है. बड़े बुजुर्गों के अलावा महिलाओं और बच्चों के पास मोबाइल भी नहीं होता. गांव में पक्के मकान हैं, लहलहाते खेत हैं, लेकिन छतों पर टीवी एंटीना या केबल लाइन का नामोनिशान नहीं. कई बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने गांव के बाहर की सड़क नहीं देखी. यही वजह है कि जोड़ और हिंडालगोल जैसे गांवों के लोग आज भी आधुनिक संचार माध्यमों से अनजान हैं.
क्या है आखिर वजह?
स्थानीय लोगों का कहना है कि मोबाइल के कई दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं. युवा पीढ़ी गलत रास्ते पर जा रही है, कई घर टूट रहे हैं. इसलिए बुजुर्गों ने फैसला लिया था कि मोबाइल और टीवी का उपयोग आवश्यकता से अधिक नहीं होना चाहिए.
जोड़ गांव के सरपंच मेहबूब ने बताया कि गांव में टीवी लगाने को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं है, बल्कि आपसी सहमति से कायम परंपरा का यह उदाहरण है. हिंडालगोल गांव के सरपंच बिलाल खान ने कहा कि टीवी और मोबाइल सुविधा तो हैं, लेकिन इनका दुरुपयोग भी होता है. बुजुर्गों ने इसे लेकर फैसला लिया था, जो आज भी ग्रामीण निभा रहे हैं.
चौपाल पर बैठकर खबरें सुनते हैं युवा-बुजर्ग
गांव में पक्के मकान हैं, लोग अपने कामों में व्यस्त रहते हैं. रात को गांव की चौपाल पर युवा और बुजुर्ग बैठकर देश-दुनिया की खबरें सुनते और चर्चा करते हैं. लेकिन घरों में टीवी या मोबाइल का इस्तेमाल बहुत सीमित है. मोबाइल भी सिर्फ जरूरत के अनुसार ही इस्तेमाल किया जाता है.
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