Jaisalmer News: एक तरफ जहां दुनिया ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को देख रही है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने पोकरण की फायरिंग रेंज में अपनी हवाई ताकत का ऐसा नजारा पेश किया है जो दुश्मनों के पसीने छुड़ाने के लिए काफी है. सेना की एयर डिफेंस ब्रिगेड ने हाई-इंटेंसिटी फायरिंग अभ्यास के जरिए यह साबित कर दिया कि भारत की आसमानी दीवार को भेदना नामुमकिन है.
ड्रोन अटैक का सेकंडों में काम तमाम
आज के दौर में युद्ध का स्वरूप बदल चुका है. अब खतरा केवल पारंपरिक मिसाइलों से नहीं, बल्कि छोटे और घातक ड्रोन्स से भी है. अभ्यास के दौरान एक काल्पनिक स्थिति बनाई गई, जिसमें दुश्मन के ड्रोन भारतीय हवाई क्षेत्र में घुसपैठ करते दिखाए गए. जैसे ही ये ड्रोन सीमा के करीब आए, सेना की एयर डिफेंस यूनिट्स 'अलर्ट मोड' पर आ गईं.

Jaisalmer Army Exercise
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पहले जाम... फिर काम तमाम!
भारतीय सेना ने इस ड्रिल में दोहरी रणनीति अपना. सबसे पहले एडवांस रडार सिस्टम ने कई किलोमीटर दूर से ही ड्रोन को ट्रैक किया और उन्हें इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जान कर दिया. ड्रोन के सिग्नल टूटते ही एंटी-एयरक्राफ्ट गनों और मिसाइल सिस्टम ने कंप्यूटर कंसोल से मिली सटीक कमांड के बाद उन्हें आसमान में ही राख के ढेर में बदल दिया.

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ये 'मिशन रेडी' रणनीति का हिस्सा
इस अभ्यास में आधुनिक रडार और हाई-टेक कंप्यूटर सिस्टम का इस्तेमाल किया गया. कंट्रोल रूम में बैठे जवानों ने स्क्रीन पर लक्ष्य की पहचान की और महज कुछ सेकंड के भीतर उसे नष्ट कर दिया. सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, यह अभ्यास केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं है, बल्कि बदलते युद्ध (जैसे ड्रोन और स्वार्म ड्रोन) की चुनौतियों से निपटने की 'मिशन रेडी' रणनीति का हिस्सा है.

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सेना ने पोकरण की धरती से यह साफ संदेश दे दिया है कि भारतीय हवाई क्षेत्र में घुसने की हिम्मत करने वाला कोई भी ड्रोन या विमान सेकंडों में मिट्टी में मिल जाएगा.