
Rajasthan News: अजमेर में महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती (Jyotirao Phule Jayanti) के अवसर पर आयोजित समारोह में उस समय विवाद खड़ा हो गया जब कांग्रेस नेता धर्मेंद्र राठौड़ (Dharmendra Rathore) ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की उपलब्धियों की चर्चा शुरू की. इससे नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध जताते हुए कार्यक्रम स्थल पर हंगामा कर दिया. इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के बेटे वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) भी मंच पर मौजूद थे.
दोनों पक्षों में तनातनी
भाजपा कार्यकर्ताओं का तर्क था कि सार्वजनिक सामाजिक आयोजनों में सभी समुदायों और विचारधाराओं के लोग एकत्र होते हैं, इसलिए किसी भी राजनीतिक दल द्वारा इसे प्रचार मंच के रूप में उपयोग करना अनुचित है. आयोजकों ने समय रहते स्थिति को संभाला और दोनों पक्षों से संयम की अपील की, जिससे माहौल शांत हुआ और कार्यक्रम पूर्ण हुआ.
क्या जयंती केवल स्मरण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए?
यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ गई है - क्या समाज सुधारकों की जयंती केवल स्मरण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए? क्या ऐसे आयोजनों को राजनीतिक भाषणों से दूर नहीं रखा जाना चाहिए? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि महात्मा ज्योतिबा फुले जैसे समाज सुधारकों का जीवन और योगदान हमें सामाजिक सुधार और समानता की दिशा में प्रेरित करता है.
महात्मा ज्योतिबा फुले का जीवन और योगदानमहात्मा ज्योतिबा फुले एक प्रख्यात सामाजिक सुधारक, दार्शनिक और लेखक थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में महिलाओं की शिक्षा और दलितों के सम्मान के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने 11 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र में जन्म लिया था और उनके भारतीय समाज और संस्कृति में योगदान को इस दिन के अवसर पर मनाया जाता है.
सत्यशोधक समाज की स्थापनाज्योतिबा फुले ने सत्यशोधक समाज की स्थापना की, जो महिलाओं और निम्न वर्गों की शिक्षा का प्रचार करता था और भारत में मौजूद जातिवादी व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़ता था। इस आंदोलन का उद्देश्य महिलाओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए शिक्षा और समान अधिकारों को बढ़ावा देना था.
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