Rajasthan News: हनुमानगढ़ के नोहर नगरपालिका में सियासत इस कदर हावी हो चुकी है कि यहां पालिकाध्यक्ष का पद विकास का नहीं बल्कि राजनीतिक खींचतान का केंद्र बन गया है. हालात यह हैं कि महज डेढ़ साल के भीतर छह बार अध्यक्ष बदले जा चुके हैं और हर बदलाव के साथ शहर की जनता असमंजस में पड़ जाती है कि आखिर नगर की जिम्मेदारी किसके हाथ में है. ताजा घटनाक्रम में राज्य सरकार ने एक बार फिर पालिकाध्यक्ष मोनिका खटोतिया को निलंबित कर दिया है. खास बात यह है कि हाईकोर्ट के आदेश पर महज दस दिन पहले ही उन्होंने अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला था, लेकिन कामकाज को पटरी पर लाने से पहले ही उन्हें फिर से पद से हटा दिया गया. इसके बाद अधिशासी अधिकारी बसंत सैनी ने स्वायत्त शासन विभाग के आदेश के तहत हाजन खातून टाक को पुनः कार्यभार ग्रहण करवाया.
राज्य सरकार का तर्क है कि मोनिका खटोतिया के अध्यक्ष पद पर बने रहने से विचाराधीन न्यायिक जांच प्रभावित हो सकती है. इसी आधार पर राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 39(6) के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है. दूसरी ओर यह भी तथ्य सामने है कि पूर्व में हुई दो जांचों में मोनिका खटोतिया पर लगे कई आरोप निराधार पाए गए थे और उन्हें दोषमुक्त किया गया था.
सरकारी आदेश में क्या बताया गया
सरकारी आदेश में बताया गया है कि पट्टा संख्या 3270 और 185 पत्रावलियों को लंबित रखने के मामले में चल रही न्यायिक जांच में कुछ आरोप प्रमाणित नहीं पाए गए थे. हालांकि जांच अधिकारी ने इस बिंदु पर कोई स्पष्ट निष्कर्ष नहीं दिया कि मोनिका खटोतिया के पति के पक्ष में जारी किया गया पट्टा संख्या 3270 भी उसी क्रम का हिस्सा है या नहीं, जबकि इससे जुड़ा रिकॉर्ड नगरपालिका में उपलब्ध है.
आदेश में यह भी उल्लेख है कि वर्ष 2023 की रिपोर्ट के अनुसार नगरपालिका में कृषि भूमि से जुड़े पट्टों की 159 फाइलें और 69 ए से संबंधित 112 फाइलें लंबित थीं. इस तरह कुल 271 फाइलों में से 185 फाइलें उप निदेशक स्थानीय निकाय विभाग बीकानेर की रिपोर्ट में अध्यक्ष के हस्ताक्षर से लंबित बताई गई थीं. इन्हीं तथ्यों के आधार पर राजस्थान नगर पालिका अधिनियम की धारा 39(4) के तहत पुनः न्यायिक जांच कराने का प्रस्ताव विधि विभाग को भेजा गया है.
क्या है सियासत
इस पूरे प्रकरण में राजनीतिक एंगल भी खुलकर सामने आ रहा है. मोनिका खटोतिया को कांग्रेस खेमे से जुड़ा माना जाता है जबकि हाजन खातून टाक को भाजपा समर्थित खेमा माना जाता है. नोहर नगरपालिका के पिछले पचास साल के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो यहां कांग्रेस और भाजपा से ज्यादा चाचान गुट और टाक परिवार के बीच सियासी जंग हावी रही है. मौजूदा विवाद में भी वही कहानी दोहराती नजर आ रही है.
कांग्रेस नेता राजेंद्र चाचान की ओर से मोनिका खटोतिया को अध्यक्ष बनाया गया था. लेकिन जैसे ही प्रदेश में सत्ता बदली और भाजपा सरकार आई, वैसे ही अन्य नगरपालिकाओं की तरह नोहर नगरपालिका से भी कांग्रेस समर्थित पालिकाध्यक्ष को हटाने की योजना बनी. भाजपा खेमा यह दावा कर रहा है कि निलंबन की पूरी प्रक्रिया कानून सम्मत तरीके से की गई है और जिन आरोपों के आधार पर कार्रवाई हुई है वे गंभीर हैं.
हालांकि यह भी एक सच्चाई है कि अदालत ने मोनिका खटोतिया की बहाली की थी, लेकिन भाजपा की सत्ता में वापसी के बाद उन्हें फिर से निलंबित कर दिया गया. इस सियासी रस्साकशी का सबसे बड़ा खामियाजा नोहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है. बार बार पालिकाध्यक्ष बदलने से विकास कार्य ठप हो रहे हैं, प्रशासनिक निर्णय अधर में लटके हुए हैं और नगरपालिका पूरी तरह अस्थिरता के दौर से गुजर रही है.
डेढ़ साल में छह बार अध्यक्ष बदलने की यह स्थिति अब राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का बड़ा विषय बन चुकी है और सवाल यही है कि आखिर नोहर को इस सियासी फुटबॉल से कब राहत मिलेगी.
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