Rajasthan News: राजस्थान में जयपुर समेत कई जिलों के शिक्षक गुरुवार (18 जून) को सड़कों पर उतर आए हैं. यह मामला 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य करने से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले के बाद से हजारों ऐसे शिक्षक असमंजस में हैं जिन्होंने अपनी सेवा के दो दशक पूरे कर लिए हैं. इस आदेश के विरोध में शिक्षक अब सड़कों पर उतर आए हैं और सरकार से राहत की गुहार लगा रहे हैं.
जिला मुख्यालयों पर दिया धरना
इस फैसले के खिलाफ अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के नेतृत्व में राज्यव्यापी प्रदर्शन किया गया. नागौर, राजसमंद, जयपुर सहित राजस्थान के सभी जिला मुख्यालयों पर शिक्षकों ने कलेक्ट्री पर धरना दिया और भारी विरोध दर्ज कराया. शिक्षकों का कहना है कि वे सालों से बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं. 20-22 साल का अनुभव रखने वाले शिक्षकों को अचानक पात्रता परीक्षा देने को कहना उनके अनुभव का अपमान है.

शिक्षिका माया गुप्ता ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि हम उन नियमों और शर्तों को पूरा करके शिक्षक बने थे जो उस वक्त प्रभावी थे. अनुभव के साथ शिक्षक बेहतर होता है, लेकिन सिस्टम अब पात्रता को एक बाधा के रूप में खड़ा कर रहा है. कई शिक्षक तो रिटायरमेंट के बेहद करीब हैं, ऐसे में उनसे दोबारा परीक्षा की उम्मीद करना तर्कहीन है.
सरकार से की जा रही है ये मांग
सभी जिलों में प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपा है. जिसमें उन्होंने लिखा 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी छूट दी जाए, शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य वैधानिक अधिकारों को पूरी तरह सुरक्षित किया जाए, सरकार संसद में कानून लाकर इस समस्या का समाधान निकाले और पुराने शिक्षकों को राहत प्रदान करें.

राजसमंद में सड़कों पर उतरे टीचर
शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन को और अधिक उग्र और व्यापक बनाएंगे. उनका मानना है कि सरकार का यह फैसला वरिष्ठ शिक्षकों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा कर रहा है.
जानें क्या है पूरा विवाद
अनिवार्य शिक्षा अधिनियम लागू होने के बाद टीईटी परीक्षा अनिवार्य की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में इस अनिवार्यता को पूर्व प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू कर दिया है. इसका सीधा अर्थ यह है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति 2010 से पहले हुई थी, उन्हें भी अब पात्रता परीक्षा पास करनी होगी.

सड़कों पर उतरे टीचर
इस पर शिक्षकों का तर्क है कि जब उन्होंने नौकरी ज्वाइन की थी, उस समय टीईटी जैसी कोई शर्त ही नहीं थी. उन्होंने अपनी नियुक्ति के वक्त सभी जरूरी चयन प्रक्रियाओं और योग्यता मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया था. अब वर्षों की सेवा के बाद उन्हें फिर से पात्रता परीक्षा के दायरे में लाना न्यायसंगत नहीं है.
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