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बीकानेर: भाई नहीं था तो बहनों ने दिया मां की अर्थी को कंधा, मुखाग्नि देकर तोड़ी वर्षों की रूढ़िवादी बेड़ियां

राजस्थान में बीकानेर के हिमटसर गांव में दो बेटियों ने अपनी मां की अर्थी को कंधा देकर और मुखाग्नि देकर समाज की रूढ़ियों को तोड़ा है. इस घटना के बाद लोगों में हर तरफ इसकी चर्चा हो रही है. 

बीकानेर: भाई नहीं था तो बहनों ने दिया मां की अर्थी को कंधा, मुखाग्नि देकर तोड़ी वर्षों की रूढ़िवादी बेड़ियां
बेटियों ने दिया मां की अर्थी को कंधा.

Rajasthan News: राजस्थान के बीकानेर जिले के हिमटसर गांव में एक ऐसी घटना घटी जो समाज की पुरानी सोच को चुनौती दे रही है. यहां दो बेटियों ने अपनी मां की मौत के बाद न सिर्फ अर्थी को कंधा दिया बल्कि मुखाग्नि देकर बेटों जैसा फर्ज निभाया.

मां का अचानक जाना

हिमटसर के रहने वाले सत्यनारायण सोमानी की 52 साल की पत्नी इंद्रा देवी का मंगलवार रात को निधन हो गया. परिवार में कोई बेटा नहीं है. सिर्फ दो बेटियां हेमलता और सोनू हैं जो शादीशुदा हैं. मां के जाने का दुख इतना गहरा था कि दोनों बहनों ने फैसला किया वे खुद अंतिम संस्कार करेंगी. उन्होंने सोचा कि मां ने उन्हें हमेशा प्यार दिया तो अब उनका कर्तव्य है कि वे मां को सम्मानजनक विदाई दें.

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अंतिम यात्रा का भावुक मंजर

बुधवार सुबह जब अंतिम यात्रा निकली तो गांव के लोग देखकर स्तब्ध रह गए. हेमलता और सोनू ने नंगे पैर चलते हुए मां की अर्थी को अपने कंधों पर उठाया. घर से मुक्तिधाम तक का पूरा रास्ता उन्होंने इसी तरह तय किया. उनकी आंखों में आंसू थे लेकिन इरादा मजबूत था. गांव वाले बताते हैं कि ऐसा दृश्य देखकर सबकी आंखें नम हो गईं. दोनों बहनों ने बचपन की यादों को संजोते हुए इस फर्ज को निभाया.

श्मशान घाट पर साहसिक कदम

श्मशान घाट पर सैकड़ों लोग जमा थे. हेमलता और सोनू ने रोते हुए सभी धार्मिक रस्में पूरी कीं. उन्होंने विधि-विधान से मां को मुखाग्नि दी. परिवार के सदस्यों ने बताया कि सत्यनारायण सोमानी ने हमेशा बेटियों को बेटों की तरह बड़ा किया और उन्हें हर फैसले में सम्मान दिया. जब बेटियों ने मुखाग्नि देने की बात कही तो पिता और रिश्तेदारों ने पूरा साथ दिया.

समाज को मिला बड़ा संदेश

समाजसेवी पवन राठी कहते हैं कि इस घटना की पूरे इलाके में चर्चा है. यह उन लोगों के लिए सबक है जो आज भी बेटे और बेटी में फर्क करते हैं. हेमलता और सोनू ने साबित कर दिया कि माता-पिता के प्रति प्यार की कोई सीमा नहीं होती. शादी के बाद भी वे अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटीं. गांव में हर कोई इन बेटियों के संस्कारों की तारीफ कर रहा हैं.

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