Rajasthan Budget Session 2026: राजस्थान विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बीच नोकझोंक देखने को मिली. डोटासरा ने शिक्षा मंत्री पर आरोप लगाया कि वे शिक्षा विभाग का बंटाधार कर रहे हैं और बच्चों का भविष्य जोखिम में डाल रहे हैं. उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री रोजाना उन्हें “जेल” भेजने की धमकी देते हैं, लेकिन वे नहा-धोकर तैयार होकर बैठते हैं, लेकिन जेल आया नहीं है. डोटासरा कोई कच्चा गोला है क्या? जो कोई भी खा जाएगा.
'स्कूलों में घट गया नामांकन'
डोटासरा ने मदन दिलावर पर तंज कसते हुए से कहा कि पहले शिक्षकों को कुत्ते भगाने और रामकथा में ड्यूटी लगाई गई, जिससे स्कूलों में नामांकन घटकर पौने दो लाख कम हो गया. स्कूल जर्जर पड़े हैं, टॉयलेट नहीं हैं, बच्चों के लिए सुविधाएं न के बराबर हैं और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर शर्म आनी चाहिए. गोविंद सिंह डोटासरा ने शिक्षा मंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि एक दूसरे पर आरोप लगाने और भाले फेंकने के बजाय शिक्षा के वास्तविक मुद्दों पर काम होना चाहिए. उन्होंने कहा कि उनका दायित्व बच्चों का भविष्य बचाना है और किसी भी दबाव में नहीं आएंगे. डोटासरा ने कहा कि शिक्षा मंत्री कथाओं और ट्वीट्स में व्यस्त हैं, लेकिन शिक्षा के नवाचार पर सिर्फ 8 ट्वीट किए, जबकि कथा में 81 ट्वीट किए.
'मौजूदा समय में सामने आए पेपर लीके मामले'
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने गोविंद सिंह डोटासरा पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री के सामने कई शिक्षकों ने यह कहा था कि डोटासरा पैसा खाते हैं. इस दौरान सदन में थोड़ी देर के लिए गहमा गहमी देखने को मिली. डोटासरा ने कहा कि 2013 से 2017 के बीच भी REET सहित कई परीक्षाओं के पेपर लीक हुए थे और कांग्रेस सरकार के समय कार्रवाई की गई थी. उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा समय में भी NEET, राजस्थान यूनिवर्सिटी (RU) के पेपर लीक होने के मामले सामने आए हैं और नवलगढ़ में RAS का पेपर खुला मिला.
डोटासरा ने आरोप लगाया कि जब उनकी सरकार थी तब भी पेपर लीक हुए लेकिन कार्रवाई हुई. इसलिए मौजूदा सरकार को भी चाहिए कि अगर कोई कमी है तो वह कार्रवाई करे. उन्होंने कहा कि अगर हिम्मत है तो पिछले 12 साल के पेपर लीक की सीबीआई जांच कराई जाए सब सच सामने आ जाएगा. डोटासरा ने ईआरसीपी, यमुना जल समझौता, पंचायत चुनाव और मनरेगा जैसी अन्य नीतियों पर भी केंद्र और राज्य सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि यमुना जल समझौते में राजस्थान के हितों की अनदेखी की गई और ईआरसीपी राष्ट्रीय परियोजना घोषित नहीं की गई. मनरेगा में पहले 90 फीसदी पैसा केंद्र से आता था, अब राजस्थान को 40 फीसदी राशि जुटानी होगी.
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