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किशनगढ़, पाली और फिर जोधपुर, 3 दिन में राजस्थान के 3 शहरों में क्यों भड़का सांप्रदायिक तनाव? किसके हैं ये खतरनाक मंसूबे?

बीते 3 दिनों में राजस्थान के 3 अलग-अलग शहरों में सांप्रदायिक माहौल बिगड़ा. आखिर इन तीनों घटनाओं की वजह क्या थी?

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किशनगढ़, पाली और फिर जोधपुर, 3 दिन में राजस्थान के 3 शहरों में क्यों भड़का सांप्रदायिक तनाव? किसके हैं ये खतरनाक मंसूबे?
Rajasthan Communal Violence: राजस्थान के तीन शहरों में तीन दिनों में क्यों भड़की सांप्रदायिक हिंसा.

Rajasthan Communal Violence: पहले किशनगढ़ (Kishangarh), फिर पाली (Pali) और अब जोधपुर (Jodhpur)... बीते तीन दिनों में राजस्थान के 3 अलग-अलग शहरों में सांप्रदायिक तनाव (Communal Violence) फैला. तीनों शहरों में पहले एक सूचना फैली, फिर कुछ ही देर में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए. जबरन बाजार बंद कराया. पथराव हुए. कई दुकानों और निजी संपत्तियों में आग लगा दी गई. तनावपूर्ण स्थिति को कंट्रोल करने में प्रशासन के पसीने छूटते नजर आए. कई-कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची फिर जाकर जैसे-तैसे स्थिति नियंत्रण में आई. 19, 20 और 21 जून को हुई इन तीनों घटनाओं से राजस्थान की गंगा-जमुना तहजीब वाली पहचान पर बट्टा लगा है. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा हुआ क्यों? दंगे जैसी यह स्थिति क्या केवल एक सूचना या अफवाह के फैलने से हुई या इसके पीछे किसी के खतरनाक मंसूबे भी हैं.

NDTV Rajasthan पर आइए जानते हैं राजस्थान के तीन शहरों की फिजा में तनाव घोलने वाली इन घटनाओं की पूरी कहानी. 


19 जून, अजमेर के किशनगढ़ में भड़का विवाद

अजमेर की किशनगढ़ सब्जी मंडी में सब्जी की एक दुकान के सामने मांस फेंके जाने से विवाद भड़का. इस विवाद की शुरुआत बुधवार दोपहर बाद वायरल हुए एक वीडियो से हुई, जिसमें एक स्कूटी सवार शख्स सब्जी मंडी में एक दुकान के सामने मांस फेंकता नजर आया. इस बात की खबर लगते ही कई हिंदूवादी संगठन के लोग सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन करते हुए बाजार बंद कराने लगे. इस दौरान पुलिस पर पथराव भी हुआ, जिसमें एक डीएसपी की गाड़ी का ड्राइवर घायल हो गया. 

किशनगढ़ की घटना पर एसपी देवेंद्र बिश्नोई ने बताया कि गांधीनगर किशनगढ़ निवासी बुंदू खान (70) को हिरासत में लिया गया है. पूछताछ में उसने बताया कि वह रिटायर्ड कर्मचारी है. बकरीद पर कुर्बानी दी थी, उसके हिस्से में जो आया था, वह लेकर बाइक पर जा रहा था. इसी दौरान कुछ टुकड़े बाजार में गिर गए. जिसके बाद वह घबराकर भाग गया. इसके बाद कुछ लोगों ने यह बात फैलाई कि सब्जी मंडी में सब्जी की दुकान के सामने एक मुस्लिम ने गो-मांस फेंक दिए. इस सूचना के फैलते ही कई हिंदूवादी संगठन बाजार में उतरकर विरोध प्रदर्शन करने लगे. 

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तस्वीर किशनगढ़ सब्जी मंडी में तनाव भड़कने के बाद की है. यहां हंगामा कर रहे लोगों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था.

मामले में सीओ सीटी महिपाल ने बताया कि सब्जी मंडी में पशु के अवशेष मिलने पर कुछ लोग उग्र हो गए थे. लोगों ने गाय का अवशेष होने की आशंका जाहिर करते हुए रिपोर्ट दी. इसमें बताया था कि कोई जानबूझकर ये डालकर गया था. इस पर टीम ने मांस के टुकड़ों को जब्त किया. बाद में उसका मेडिकल करवाया गया, और रिपोर्ट में बताया गया कि ये भैंस के मांस के टुकड़े थे.

यह भी पढ़ें - किशनगढ़ सब्जी मंडी में मीट फेंके जाने से भारी बवाल, गुस्साए लोगों ने बाजार बंद कराया, पुलिस ने लाठीचार्ज कर खदेड़ा

 
20 जून, पाली में बिगड़ा सांप्रदायिक माहौल

20 जून, गुरुवार की रात पाली जिले में पशुओं के कटे सिर के अवशेष मिलने के बाद तनाव बढ़ा. हिंदू संगठनों ने जयपुर-जोधपुर मार्ग को ब्लॉक करके टायर जलाए और विरोध प्रदर्शन किया. मगर इसके कुछ देर बाद वहां भीड़ बढ़ते ही पत्थरबाजी शुरू हो गई. ऐसे में स्थिति को काबू करने के लिए मौके पर जमा भारी पुलिस बल ने भीड़ पर लाठीचार्ज भी करना पड़ा. इस घटना को लेकर गुरुवार रात पाली के अचानक सांप्रदायिक माहौल बिगड़ा. लेकिन बाद में पुलिस की सख्ती के बाद माहौल शांत हुआ.  

हिंदू संगठन बोले- 'ये गाय के कंकाल'

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विपिन शर्मा ने बताया कि गुरुवार रात कोतवाली थाने को बांडी नदी की रपट पर लोगों की भीड़ जमा होने की सूचना मिली थी, जिन्होंने रास्ता ब्लॉक कर रखा था. इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए वो सीओ सिटी जितेंद्र सिंह और अतिरिक्त जिला कलेक्टर राजेश गोयल भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे.

तस्वीर पाली में सांप्रदायिक तनाव गहराने के बाद की है. यहां भी पुलिस को भीड़ पर लाठीचार्ज करना पड़ा था.

तस्वीर पाली में सांप्रदायिक तनाव गहराने के बाद की है. यहां भी पुलिस को भीड़ पर लाठीचार्ज करना पड़ा था.


हिन्दू संगठनों का कहना था कि वहां चार से ज्यादा पशुओं के कटे सिर के अवशेष मिले हैं, जो गोवंश हैं. हमने उन्हें समझाने का प्रयास भी किया कि सिर्फ कंकाल देखकर नहीं बताया जा सकता है कि वो भैंस का है, या गाय का. इसके लिए जांच जरूरी है. भीड़ ने हमारी नहीं सुनी और वहां टायर जलाकर प्रदर्शन करने लगे, और फिर पत्थरबाजी भी की. इस कारण हमें हल्का बल प्रयोग कर उन्हें वहां से खदेड़ना पड़ा.' पाली की इस घटना पर अभी जांच जारी है. पुलिस ने अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज किया है. 

यह भी पढ़ें - सड़क जाम, पथराव फिर लाठीचार्ज! जानवरों के कटे सिर के अवशेष मिलने से पाली में बढ़ा तनाव


21 जून, जोधपुर में भड़का सांप्रदायिक तनाव

21 जून, शुक्रवार रात जोधपुर के सूरसागर इलाके में एक ईदगाह के गेट खोले जाने को लेकर विवाद भड़का. राजाराम सर्किल के पास हुई इस हिंसा का कारण ईदगाह के पीछे की तरफ बनाया जा रहा एक गेट है. इस गेट के निर्माण को लेकर करीब 15 साल पहले भी विवाद हुआ था, जिसके बाद इसके निर्माण पर रोक लगा दी गई थी. लेकिन कल शाम उस समझौते को तोड़ दिया गया.

हनुमान मंदिर के सामने ईदगाह का गेट खोलने की खबर हिंदू समाज के लोगों को पता चलते ही वो इसका विरोध करने पहुंच गए. कुछ देर की गहमागहमी के बाद गेट हटाने पर सहमति बन गई. हालांकि अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ लोगों को यह फैसला पसंद नहीं आया और देर रात वो सड़कों पर उतर आए. इसके बाद दोनों समुदाय के लोगों में करीब डेढ़ घंटे तक पत्थरबाजी हुई. इस दौरान एक दुकान और एक ट्रैक्टर को आग लगा दी गई. जबकि एक जीप में तोड़फोड़ की गई.

जोधपुर तनाव मामले में 45 लोग गिरफ्तार, 200 पर केस दर्ज

जोधपुर पश्चिम के पुलिस उपायुक्त राजेश कुमार यादव ने बताया कि बीते रात हुए इस तनाव में दो पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. हमने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर दो एफआईआर दर्ज की हैं. इन एफआईआर में कुल 200 लोगों के नाम हैं. अब तक कुल 45 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें से 7 हिंदू समुदाय से हैं. शेष संदिग्धों को पकड़ने के लिए पुलिस इलाके में छापेमारी कर रही है. इस वक्त स्थिति नियंत्रण में है. 

बड़ा सवाल- आखिर राजस्थान में अचानक क्यों बढ़े ऐसे मामले

इन तीन घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर राजस्थान में ऐसी घटनाएं क्यों हो रही है. काफी दिनों से शांत रहे राजस्थान में आखिर ऐसा क्या हुआ कि ऐसी घटनाएं सामने न लगी. इसमें कई लोग अफवाहों को कारण बता रहे हैं. कई लोग सोशल मीडिया को भी वजह मान रहे हैं.

वहीं कुछ लोगों का ये भी कहना था कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को प्रदेश की 11 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था, तो इसमें कोई राजनीतिक वजह भी हो सकती है. सांप्रदायिक तनाव की ये तीनों घटनाएं जिन शहरों में घटी हैं, वहां भाजपा ने चुनाव जीता है. 

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