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राजस्थान पुलिस की भूमिका पर हाई कोर्ट को शक, फर्जी कॉल सेंटर मामले में CBI जांच के आदेश

युवतियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर दावा किया कि 15 जनवरी 2025 की शाम उन्हें घरों से उठाकर बिना किसी एफआईआर के रातभर थाने में रखा गया.

राजस्थान पुलिस की भूमिका पर हाई कोर्ट को शक, फर्जी कॉल सेंटर मामले में CBI जांच के आदेश
ऱाजस्थान हाई कोर्ट

Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने कुड़ी भगतासनी थाने के कथित फर्जी कॉल सेंटर मामले में पुलिस की भूमिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए आगे की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है. न्यायमूर्ति अनिल कुमार उपमन की एकल पीठ ने माना कि मामले में पुलिस की कार्रवाई ने निष्पक्ष जांच और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

मामला जनवरी 2025 का है, जब साइबर क्राइम यूनिट से मिली सूचना पर कुड़ी भगतासनी पुलिस ने रणबंका होटल के सामने चल रहे एक कॉल सेंटर पर कार्रवाई कर एफआईआर नंबर 27/2025 दर्ज की. आरोप है कि “पावर ब्रेक डाउन सर्विस इंडिया” और “सॉल्यूशन ब्रेकडाउन सर्विस टू इंडिया” नाम से चल रहे इस कॉल सेंटर से देशभर में लोगों को ऑनलाइन ठगा जा रहा था. यहां काम करने वाली छात्राएं लक्षिता, लक्ष्मी, सोनिया और प्रियांका मेवाड़ा सहित दस युवतियों को पुलिस ने आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार कर लिया और उनके खिलाफ चालान भी पेश कर दिया.

सीसीटीवी में कैद हुई थी पुलिस की करतूत

युवतियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर दावा किया कि 15 जनवरी 2025 की शाम उन्हें घरों से उठाकर बिना किसी एफआईआर के रातभर थाने में रखा गया. प्रियांका मेवाड़ा ने अपने घर के सीसीटीवी फुटेज पेश किए, जिनमें एसआई शिमला को सरकारी वाहन से आकर युवतियों को घर से ले जाते देखा गया. अदालत ने रिकॉर्ड मंगवाया तो 15 जनवरी की शाम और रात की जनरल डायरी प्रविष्टियों में युवतियों को थाने लाने या छोड़ने का कोई उल्लेख नहीं मिला, जबकि पुलिस का कहना था कि उन्हें पूछताछ के बाद उसी रात छोड़ दिया गया था.

पुलिस की भूमिका पर कोर्ट को संदेह

कोर्ट के सामने यह तथ्य भी आया कि 15 जनवरी की रात 9 बजे के बाद का थाने का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं कराया जा सका. साथ ही गिरफ्तारी मेमो पर ऐसे समय दर्ज थे और उन पर एफआईआर नंबर लिखा था, जब तक FIR औपचारिक रूप से दर्ज ही नहीं हुई थी. अदालत ने इसे दस्तावेजों के बाद में तैयार होने और रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की आशंका मानते हुए पुलिस संस्करण पर गंभीर संदेह जताया.

6 महीने में CBI रिपोर्ट पेश करने का आदेश

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब खुद स्थानीय पुलिस अधिकारियों पर ही अवैध हिरासत, साक्ष्य छिपाने और कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप हों, तो उसी एजेंसी से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती. कोर्ट ने निर्देश दिया कि कुड़ी भगतासनी थाना एक सप्ताह के भीतर पूरा रिकॉर्ड CBI को सौंपे, CBI छह महीने के भीतर स्वतंत्र जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करें और तब तक निचली अदालत में चल रही सुनवाई रोकी जाए.

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