
Rajasthan Politics: कोटा के ऑडिटोरियम में बुधवार को पंचायतीराज विभाग की संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक हुई. इस दौरान पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने पिछले दिनों सुल्तानपुर में 3 पंचायत के किए गए आकस्मिक निरीक्षण की घटना की चर्चा की. उन्होंने बताया, "जब सुल्तानपुर की तीन पंचायत का निरीक्षण किया, तो वहां मुझे गंदगी मिली. मैने जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की. अगले दिन वो सभी लोग सांगोद के विधायक ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के पास पहुंच गए."
"ऊर्जा मंत्री को गलत जानकारी दी"
मदन दिलावर ने बताया, "मेरी शिकायत करते हुए कहा कि सरकार सफाई के लिए पैसे तो देती नहीं है, पंचायत के पास अपना पैसा है नहीं. सफाई कैसे कराएं. ऊपर से मंत्री जी कार्रवाई कर देते हैं. इस बात को लेकर ऊर्जा मंत्री और मेरे बीच हॉट टॉक हो गई. मंत्री जी मानने को ही तैयार नहीं थे, तो मैंने ऊर्जा मंत्री को सारी लिस्ट भेजी और बताया कि सरकार कितना-कितना पैसा दे रही है. तब ऊर्जा मंत्री ने भी स्वीकार किया कि उनको गलत जानकारी दी. सरपंच पंचायत में सफाई के लिए पैसा नहीं होने की झूठी जानकारी क्षेत्र के विधायकों को देते हैं."
यूआईटी सभागार में पंचायती राज मंत्री ने बैठक की
कोटा के बालाजी नगर स्थित यूआईटी सभागार में आयोजित बैठक का पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने दीप जलाकर शुभारंभ किया. पहले सत्र में कोटा संभाग के बारां और कोटा जिले के पंचायती राज के सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की बैठक हुई. दूसरे सत्र में झालावाड़ और बूंदी के अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए. बैठक में अधिकारियों के पेश किए गए स्वच्छता अभियान के आंकड़ों पर नाराजगी जताई.
मंत्री दिलावर बोले- आगे भी कार्रवाई करूंंगा
मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि जो आंकड़े पेश किए गए वह झूठे हैं. धरातल पर यह आंकड़े ठीक नहीं है, जो अधिकारी झूठे आंकड़े तैयार कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. उन्होंने कहा, "मुझे झूठे आंकड़े पेश करना बिल्कुल भी पसंद नहीं है. मैं अब तक प्रदेश की 50 ग्राम पंचायत का आकस्मिक निरीक्षण कर चुका हूं. 2 या 3 पंचायत को छोड़ दें तो किसी भी पंचायत में राज्य सरकार के स्वच्छता अभियान के आदेशों का पालन नहीं हो रहा है. केवल घालमेल किया जा रहा है. कुछ के खिलाफ मैंने कार्रवाई की है. आगे भी सख्त कार्रवाई करूंगा."
"सफाई के लिए 40 लाख रुपए तक दिए जा रहे हैं"
मंत्री दिलावर ने सवाल किया कि छोटी से छोटी पंचायत में 80 हजार रुपए से लेकर 40 लाख रुपए तक सालाना सफाई के लिए दिए जा रहे हैं. फिर यह पैसा जाता कहां है? सफाई क्यों नहीं होती? जिसने भी सफाई मद के पैसे से निर्माण कार्य किया है, उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करते हुए पैसे वसूल किए जाएंगे, जिस अधिकारी ने निर्माण कार्य स्वीकृत किया होगा, उससे भी वसूल किया जाएगा. बहाने बनाते हैं, सफाई तो की थी साहब लेकिन दिख नहीं रही, सफाई हुई नहीं तो फिर दिखेगी कैसे?"
"हम पाप के भागीदार बन रहे हैं"
मंत्री मदन दिलावर ने कहा, "मैं गांव में जाता हूं. पूछता हूं तो लोग कहते हैं कि पंचायत झाड़ू भी निकालती है, यह तो हम पहली बार सुन रहे हैं. अभी तक तो हम ही पैसे देकर झाड़ू निकलवा रहे हैं. गांव में लोग गंदगी के कारण बीमार होकर मर रहे हैं, और हम पैसा निर्माण कार्य पर खर्च कर रहे हैं. ऐसा करके हम पाप के भागीदार बन रहे हैं. परंतु अब कोई भी नहीं बचेगा. अब भी आप काम करवाना शुरू कर दो, तो पुराने पाप धुल जाएंगे. अगर अब भी नहीं सुधरे तो पूरे 5 साल का पैसा जांच कर वसूल लूंगा."
"राजस्थान देश में नंबर वन स्वच्छ चाहिए"
मंत्री ने सलाह दी कि एक बार अभियान चलाकर पूरी पंचायत को साफ कर लो, उसके बाद नियमित सफाई शुरू करो. गांव में रोज झाड़ू निकालना चाहिए. कीचड़ और कचरा नहीं होना चाहिए. रोज गाड़ी घर-घर कचरा लेने आनी चाहिए. टेंडर में भी गाड़ी से कचरा संग्रहण करने का पैसा शामिल है, फिर गाड़ी क्यों नहीं लगा रहे हैं? जो ठेकेदार टेंडर शर्तों के मुताबिक गाड़ी नहीं लग रहा है, उसका पैसा काटो. यदि सप्ताह में 3 दिन ही सफाई कर रहा है, तो उसका शेष दिन का पैसा भी भुगतान मत करो.
"मैं तुम्हारा रक्षा कवच"
मंत्री ने बैठक में उपस्थित जिला प्रमुखों, पंचायत समिति प्रधानों और सरपंचों को डांटने के बाद संबल भी दिया. कहा कि सही काम करोगे तो मैं तुम्हारा रक्षा कवच हूं, कोई तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता. लेकिन गलत काम करोगे, तो कोई मुझसे बचा भी नहीं सकता. सीधी कार्रवाई करूंगा. एक को भी नहीं छोडूंगा, फिर चाहे वह कोई भी हो?
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