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राजस्थान के टॉप 10 कलेक्टर कौन, फाइल निपटारे में सलूंबर कलेक्टर को 11 मिनट तो चित्तौड़गढ़ कलेक्टर को 22 घंटे लग रहे

ई-फॉलिंग के तहत राजस्थान में नवगठित जिलों में तैनात कलक्टर सबसे तेज गति में फाइलों का निपटारा कर रहे हैं. लेकिन चित्तौड़गढ़ जिला कलक्टर फाईल का निपटारा करने में 22 घंटे से अधिक का समय लग रहा हैं. 

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राजस्थान के टॉप 10 कलेक्टर कौन, फाइल निपटारे में सलूंबर कलेक्टर को 11 मिनट तो चित्तौड़गढ़ कलेक्टर को 22 घंटे लग रहे
संबूलर कलेक्टर जसमीत सिंह संधू चित्तौड़गढ़ कलेक्टर अलोक रंजन

Rajasthan News: विभिन्न सरकारी कार्यालयों में फाइलों की ऑनलाइन निपटारा करने व उनकी मोनेटरिंग के लिए ई-फाईलिंग सिस्टम शुरू किया गया ताकि फाइल किस स्तर पर चल रही हैं. उसकी स्थिति ऊपरी स्तर तक भी देखी जा सके. ई-फॉलिंग के तहत राजस्थान में नवगठित जिलों में तैनात कलक्टर सबसे तेज गति में फाइलों का निपटारा कर रहे हैं. लेकिन चित्तौड़गढ़ जिला कलक्टर को ई-फाईलिंग में एक फाईल का निपटारा करने में 22 घंटे से अधिक का समय लग रहा हैं. 

हाल ही में सरकार ने ई-फाइलिंग सिस्टम में राजस्थान प्रदेश के 47 जिलों के कलक्टरों की रैंकिंग जारी की है. इसमें सलूंबर कलक्टर सबसे तेज हैं, वे अपने कार्यालय में आने वाली एक फाइल 11 मिनट में निपटा रहे हैं. वहीं तीन जिलों के कलक्टरों को फाइल निपटाने में 22 घंटे तक लग रहे हैं. कई आईएएस कपल भी अलग-अलग जिलों में बतौर कलक्टर काम कर रहे हैं, उनमें से 2 अफसर अपनी पत्नियों से आगे हैं. अफसरों की जवाबदेही बनाने के लिए ई-फाइलिंग सिस्टम की शुरुआत का असर तो दिख रहा है, लेकिन कुछ कलक्टरों के बीच इसे लेकर असंतोष भी व्याप्त हो रहा है.

जसमीत सिंह संधू पहले नंबर तो उनकी पत्नी 9वें नंबर पर

फाइल निपटाने के मामले में जसमीत सिंह संधू जहां पहले नंबर पर हैं, वहीं उनकी पत्नी अर्तिका शुक्ला नौवें नंबर पर रहीं. संधू सलूंबर और अर्तिका खैरथल तिजारा में कलक्टर हैं. इसी तरह आठवें नंबर पर रहे डूंगरपुर के कलक्टर अंकित कुमार सिंह की पत्नी अंजली राजोरिया 43 वें नंबर पर रही.अजंली द्वारा एक फाइल निपटाने का औसतन समय 8 घंटे 33 मिनट आया है. अंजली राजौरिया प्रतापगढ़ जिले में कलक्टर हैं. इस रैंकिंग में प्रदेश के सबसे पीछे तीन कलक्टर रहे हैं वो रेड लिस्ट में शामिल हैं. 47 जिलों के कलक्टरों में से 3 कलक्टरों का फाइल निपटाने का काम मुख्य सचिव सुधांश पंत के स्तर पर काफी नाराजगी वाला रहा है. इन तीनों जिला कलक्टरों को रेड लिस्ट में शामिल किया गया है. रेड लिस्ट को ब्यूरोक्रेसी में चिंताजनक स्थिति की लिस्ट माना जाता है. यह तीन जिले हैं. राजसमंद, बीकानेर और चित्तौड़गढ़ हैं. इन तीनों जिलों में क्रमशः भंवरलाल, नमृता वृष्णि और आलोक रंजन जिला कलक्टर हैं. इनमें से भंवरलाल 13 घंटे 22 मिनट, नमृता 15 घंटे 2 मिनट और रंजन 22 घंटे 22 मिनट का समय लेकर एक फाइल निपटा रहे हैं.

सूची में शामिल हैं 11 से लेकर 25 तक की रैकिंग के जिला कलक्टर

ग्रीन सूची में हैं जिसे  ठीक-ठाक माना जाता है, उसमें टॉप-10 के बाद 11 से लेकर 25 तक की रैंकिंग मिली है. इन कलक्टरों को एक फाइल निपटाने में औसतन एक घंटे 34 मिनट से लेकर 3 घंटे 51 मिनट तक का समय लग रहा है. झालावाड़ के कलक्टर अजय सिंह राठौड़ 11वें नम्बर हैं. उन्हें एक फाइल निपटाने में एक घंटे 34 मिनट का समय लगा है. उनके बाद 25 नंबर तक क्रमशः शुभम चौधरी (सिरोही), श्रीनिधी (धौलपुर), सौम्या झा (टोंक), अवधेश मीणा (अनूपगढ़ ), देवेंद्र कुमार (दौसा), बालमुकुंद असावा (डीडवाणा), कल्पना अग्रवाल (बेहरोड़), लोकबंध (श्रीगंगानगर), रोहिताश सिंह तोमर (बारां), कुशाल यादव (सवाईमाधोपुर), चिन्मई गोपाल (झुंझुनूं), आशीष गुप्ता (अलवर), कमर अल जमान (सीकर) और सुशील कुमार(बालोतरा ) शामिल हैं.

इस रैंकिंग लिस्ट में 25 से 44 के बीच खराब टाइमिंग मानी गई हैं. अजमेर कलक्टर 25 वें नंबर पर हैं वे 4 घंटे 5 मिनट में एक फाइल निपटा रही हैं. उनके बाद 44 वें नंबर तक जो कलक्टर हैं वे 4 घंटे से लेकर यह हैं 9 घंटे 47 मिनट तक का समय औसतन एक फाइल में लगा रहे हैं. इनमें क्रमशः अक्षय गोदारा (बूंदी), नीलाभ सक्सेना (करौली), लक्ष्मीनारायण (पाली), गौरव अग्रवाल (जोधपुर), अमित यादव (भरतपुर), शरद मेहरा (नीमकाथाना), नमित मेहता (भीलवाड़ा), कानाराम (हनुमानगढ़), अरुण कुमार पुरोहित (नागौर), निशांत जैन (बाड़मेर), प्रताप सिंह (जैसलमेर), हरजी लाल अटल (फलौदी), पुष्पा सत्यानी (चूरू), अरविंद पोसवाल (उदयपुर), पूजा कुमारी (जालोर), श्रुति भारद्वार (डीग), अंजली राजौरिया (प्रतापगढ़) और इंद्रजीत यादव (बांसवाड़ा) हैं.

ई-फाइलिंग में टॉप-10 जिले 

जिलों में पहली बार बनने वाले 7 जिले सलूंबर, शाहपुरा, ब्यावर, केकड़ी, सांचौर, गंगापुर सिटी और खैरथल- तिजारा शामिल हैं. इनमें से भी तीन जिले सलूंबर, शाहपुरा और सांचौर लगातार टॉप पहले, दूसरे व तीसरे स्थान पर हैं.

रैंक- 1. जसमीत सिंह संधू, सलूंबर संधू मात्र 11 मिनट में एक फाइल निपटा रहे हैं. वे पहले नवगठित जिले फलोदी में कलक्टर थे हाल ही सलूंबर लगाए गए हैं. सलूंबर भी पहली बार जिला बना है.

रैंक- 2. राजेन्द्र सिंह शेखावत, शाहपुरा आरएएस से प्रमोट होकर
आईएएस बने शेखावत पहले करौली जिला कलक्टर रह चुके हैं. वे 21 मिनट में एक फाइल का निस्तारण कर रहे हैं.

रैंक- 3. शक्ति सिंह राठौड़, सांचौर सांचौर नया जिला बना है और राठौड़ भी पहली बार कलक्टर बने हैं. कलक्टर राठौड़ 45 मिनट में एक फाइल निपटा रहे हैं.

रैंक- 4. प्रकाश राजपुरोहित, जयपुर जयपुर से पहले विभिन्न जिलों के कलक्टर रह चुके हैं. जयपुर जिले का प्रदेश में सबसे बड़ा कार्यक्षेत्र है. राजपुरोहित 53 मिनट में एक फाइल निपटा रहे हैं.

रैंक- 5. गौरव सैनी, गंगापुर सिटी गंगापुर सिटी भी पहली बार जिला बना है. कलक्टर सैनी 56 मिनट में एक फाइल निपटा रहे हैं. सैनी पहली बार कलक्टर बने हैं.

रैंक- 6. उत्सव कौशल जिला कलक्टर जो नवगठित जिलों में ब्यावर सबसे बड़ा जिला हैं. कौशल पहली बार कलक्टर बने हैं. 59 मिनट में वे एक फाइल निपटा रहे हैं.

रैंक- 7. रविंद्र गोस्वामी, कोटा एक घंटे एक मिनट में एक फाइल निपटा रहे हैं. 

रैंक- 8. अंकित कुमार सिंह डूंगरपुर जिला कलक्टर हैं. वे एक घंटे 5 मिनट में एक फाइल निपटा रहे हैं.

रैंक- 9. अर्तिका शुक्ला खैरथल-तिजारा से कलक्टर हैं. शुक्ला एक घंटा 5 मिनट का समय लेकर एक फाइल निपटा रही हैं.

रैंक- 10. केकड़ी जिला कलक्टर श्वेता चौहान जिला कलक्टर है. चौहान भी पहली बार कलक्टर बनी हैं. वे एक घंटा 8 मिनट के समय में एक फाइल निपटा रही हैं.

क्या है ई-फाइलिंग सिस्टम 

ई-फाइलिंग सिस्टम के तहत कोई भी अधिकारी खासकर जिला कलक्टर किसी फाइल को कब तक बिना फैसला किए खुद के पास रोकता है, इस बात की जानकारी मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री को सीधे तौर पर पहुंचती है. उदाहरण- मान लीजिए किसी अधीनस्थ अधिकारी ने 11 मई-2024 को दोपहर 2 बजे किसी फाइल को कलक्टर के पास भेजा, तो कलक्टर के स्तर पर वो फाइल कब और कितने बजे वापस निकलेगी इसका समय और तारीख दोनों सिस्टम पर दर्ज होंगी. अगर किसी फाइल पर सामान्यतः दो मिनट या 10 मिनट में फैसला हो सकता हो और उसे कोई अधिकारी अपने पास लेकर बैठा रहे तो इस पर उसे टोका जाना आसान होता है. उसकी कार्यप्रणाली लेटलतीफी की है, इसे कंप्यूटर के जरिए सत्यापित किया जा सकता है. सीएस सुधांश पंत इसलिए इस सिस्टम पर जोर दे रहे हैं कि फाइलों को रोकना, बेवजह ज्यादा समय तक दबाए बैठे रहना और उन पर समय पर निर्णय नहीं करना उचित नहीं है. इसलिए उन्होंने अपने औचक निरीक्षणों के दौरान अधिकारियों की टेबल्स पर पड़ी फाइलों की खुद मोबाइल से फोटो खींची थी. फाइलों के निस्तारण पर ज्यादा जोर दिए जाने से जिलों में कलक्टर के स्तर पर फील्ड वर्क, निरीक्षण, दौरे, रात्रि चौपाल, सुनवाई जैसे कार्य प्रभावित हो रहे हैं. कुछ कलक्टरों का कहना है कि फाइल निपटाना भीमहत्वपूर्ण है, लेकिन फील्ड वर्क जिला कलक्टर के कार्यों में सबसे खास होता है.

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