आरएलपी के मुखिया हनुमान बेनीवाल के बयान पर सियासत गरमा गई है. सीएम भजनलाल शर्मा पर बयान के मामले में कैबिनेट मंत्री केके बिश्नोई ने पलटवार किया है. उन्होंने बेनीवाल को नसीहत देते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता के मुद्दे उठाना हर जनप्रतिनिधि का अधिकार है, लेकिन मर्यादित भाषा का प्रयोग होना चाहिए. मुख्यमंत्री के लिए जिस प्रकार के शब्दों का इस्तेमाल किया गया, वह पूरी तरह अनुचित और निंदनीय है.
बेनीवाल से मांगा रिपोर्ट कार्ड
हनुमान बेनीवाल के आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि धरना देना सबका मौलिक अधिकार है. लेकिन धरने का रिपोर्ट कार्ड भी जनता के सामने रखना चाहिए कि उनके द्वारा पिछले आंदोलनों से क्या परिणाम निकले. बिश्नोई ने कहा कि केवल मीडिया के सामने आकर बयान देना ही राजनीति नहीं है, बल्कि जनता के मुद्दों के समाधान तक लड़ाई लड़नी चाहिए.
"सुर्खियां बटोरने के लिए बयानबाजी करते हैं बेनीवाल"
बिश्नोई ने कहा कि राजस्थान की राजनीति हमेशा संस्कार, सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रही है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पिछले करीब ढाई वर्षों से दिन-रात प्रदेश को विकसित राजस्थान बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. ऐसे में उनके लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना गलत संदेश देता है. इस तरह की बयानबाजी केवल टीआरपी और सुर्खियां बटोरने के लिए की जा रही है.
चुनावी हार का जिक्र कर बिश्नोई ने कसा तंज
कैबिनेट मंत्री ने कहा, "चुनाव में हार-जीत जनता का फैसला होता है और हार की बौखलाहट में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं माना जा सकता. अंत में उन्होंने कहा कि सभी जनप्रतिनिधि मर्यादित शब्दों का उपयोग करें, क्योंकि हल्के शब्दों से न कोई छोटा होता है और न कोई बड़ा."
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