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This Article is From Jan 15, 2024

चित्तौड़गढ़ किले पर कोर्ट का सुप्रीम फैसला, 5 KM रेंज में ब्लास्टिंग माइनिंग पर लगी रोक 

Supreme Court's verdict: चित्तौड़गढ़ किला अपने अस्तित्व के लिए दोहरे खतरे का सामना कर रहा है. ऐसे दौर में सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश मील का पत्थर साबित होगा.

चित्तौड़गढ़ किले पर कोर्ट का सुप्रीम फैसला, 5 KM रेंज में ब्लास्टिंग माइनिंग पर लगी रोक 
चित्तौड़गढ़ किला

World Heritage Chittorgarh Fort: वर्ल्ड हेरिटेज चित्तौड़गढ़ किलों के इतिहास और विरासत को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने चित्तौड़गढ़ किले से 5 किलोमीटर के दायरे में माइनिंग ब्लास्टिंग पर रोक लगा दी हैं. रिपोर्ट में किले पर बन्दरों का आतंक व कूड़ा कचरा का भी उल्लेख किया हैं. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पांच किलो मीटर के दायरे से बाहर मैनुअल व मैकेनिकल वैध खनन की परमिशन रहेगी. 

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआईआर रुड़की की रिपोर्ट देखने और सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद चित्तौड़गढ़ किले के पांच किलोमीटर परिधि में ब्लास्टिंग माइनिंग की रोक के आदेश दिए.

2012-13 से लंबित था मामला 

सुप्रीम कोर्ट ने चित्तौड़गढ़ किले की सुरक्षा के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की ओर से किए गए अपर्याप्त उपायों पर विचार करते हुए किले के लिए एक व्यापक संरक्षण योजना तैयार करने की भी सिफारिश की हैं. यह आशा की जाती है कि ये उपाय ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ किले की सुरक्षा करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसके संरक्षण को सुनिश्चित करने में मदद करेंगे. सुप्रीम कोर्ट में 2012-13 से लंबित इस मामले में फैसला दिया हैं.

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सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने चित्तौड़गढ़ किले के 10 किलोमीटर में किसी भी तरह की माइनिंग पर रोक लगाने वाली राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ बिड़ला कॉर्पोरेशन लिमिटेड व अन्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था. सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी शुक्रवार को दिए फैसले में चित्तौड़गढ़ किले के 5 किलोमीटर के दायरे में खनन पर रोकने का आदेश दिया.

CBIR रुड़की की रिपोर्ट में बंदर और कचरे का उल्लेख

CBIR रुड़की की रिपोर्ट में किले की दुर्दशा के अन्य कारण भी दिए गए थे. इनमें धन की समस्या, पर्यटकों की संख्या, अवांछित वनस्पति का बढ़ना और मूर्तियों का विरूपित होना भी किले की दुर्दशा में योगदान बताए गए हैं. CBIR रुड़की की रिपोर्ट में चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर कूड़ा कचरा और बन्दरों का आतंक होने का भी उल्लेख किया गया है.

सख्ती से कदम उठाने के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खनिज संपदा का दोहन सामुदायिक हित पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होना चाहिए. कोर्ट ने अपने आदेश में चित्तौड़गढ़ किला क्षेत्र में अनधिकृत कूड़े-कचरे व बंदरों के आतंक के बारे में राजस्थान सरकार और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 को सख्ती से लागू करने के कदम उठाए जाने के आदेश दिए हैं.

गौरतलब है चित्तौड़गढ़ किले के 5 किमी दायरे में माइनिंग ब्लास्टिंग रोक से मानपुरा, जई, सुरजना क्षेत्र में पत्थर खदानों पर इस आदेश का असर पड़ेगा. क्योंकि आसपास की चूना पत्थर की खदानों से होने वाले विस्फोटों ने चित्तौड़गढ़ किले के अस्तित्व के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं.

विशेषज्ञ समिति गठन करने के आदेश

कोर्ट ने 5 किलोमीटर के दायरे से दूर विस्फोट से किले पर पर्यावरण प्रदूषण के प्रभाव के अध्ययन के लिए आईआईटी, धनबाद के इंडियन स्कूल ऑफ माइंस को दो सप्ताह में विशेषज्ञ समिति के गठन के भी निर्देश दिए. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पांच किलोमीटर के दायरे से बाहर मैनुअल व मैकेनिकल वैध खनन की अनुमति रहेगी. जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने बिरला कॉरपोरेशन की अपील पर यह आदेश दिया.

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