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राजस्थान में MBBS के फेक डॉक्यूमेंट का धंधा उजागर, दौसा, सवाई माधोपुर के बाद अलवर में भी फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार

ये गिरोह विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को एफएमजीई का फर्जी सर्टिफिकेट देता था. इसके बदले में गिरोह के सरगना ने लाखों रुपए वसूले.

राजस्थान में MBBS के फेक डॉक्यूमेंट का धंधा उजागर, दौसा, सवाई माधोपुर के बाद अलवर में भी फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार
अलवर में मेडिकल प्रैक्टिस करने वाला इंद्रराज गुर्जर और फर्जी सर्टिफ़िकेट बांटने वाला बानाराम,

Rajasthan Fake Doctors case: राजस्थान SOG ने फ़र्ज़ी डॉक्टर तैयार करने वाले गिरोह का खुलासा किया है. एफ़एमजीई सर्टिफ़िकेट देने वाला मुख्य आरोपी बानाराम एजेंसी के हत्थे चढ़ गया है. वह एसओजी से बचने के लिए अलग-अलग देशों में भागता फिर रहा था. अब 2 दिन पहले ही फर्जी डॉक्टर इंद्रराज गुर्जर को भी गिरफ़्तार किया गया है. कल (शनिवार) रात एसओजी टीम ने इस फ़र्ज़ी डॉक्टर रैकेट का ख़ुलासा करते हुए जानकारी दी. यह गिरोह राजस्थान समेत देशभर के छात्रों से लाखों रुपए ऐंठ चुका है.  

इंद्रराज गुर्जर 10 फरवरी तक रिमांड पर

इंद्रराज गुर्जर को 10 फ़रवरी तक रिमांड पर भेजा गया है. इंद्रराज ने पूछताछ में बताया कि उसने कई अन्य डॉक्टर के भी फर्जी सर्टिफिकेट भानाराम से बनवाए थे. एडीजी (एसओजी) विशाल बंसल ने बताया कि इंद्रराज कजाकिस्तान से एमबीबीएस किया और साल 2022 में उसने फर्जी सर्टिफिकेट लिया. इसके बाद राजस्थान मेडिकल काउंसलिंग में फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर रजिस्ट्रेशन करावाया. इंद्रराज अलवर में राजीव गांधी मेडिकल कॉलेज में प्रैक्टिस कर रहा था. इसके अलावा दौसा और सवाईमाधोपुर में फर्जी डॉक्टर पकड़ में आ चुके हैं.

एफएमजीई एग्जाम के बारे में जानिए

विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को भारत आने पर एफएमजीई (Foreign Medical Graduate Examination) एग्जाम देना अनिवार्य होता है. इसके एंट्रेंस टेस्ट के बाद ही वह मेडिकल प्रैक्टिस के लिए पात्र होते हैं. इस गिरोह ने उन छात्रों से संपर्क किया, जो एफएमजीई में फेल हो जाते हैं. इन अभ्यर्थियों से लाखों रुपए लेकर उन्हें फर्जी सर्टिफिकेट दिया. 

मुख्य सरगना 2 फरवरी को हुआ था गिरफ्तार

गैंग के मुख्य सरगना भानाराम उर्फ़ भानु को 2 फरवरी को गिरफ्तार किया गया. पुलिस को सूचना मिली थी कि वह दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंच रहा है. सूचना मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ जाल बिछाया और उसे धर-दबोचा. इससे पहले पीयूष देवेंद्र और शुभम को भी एजेंसी ने ने गिरफ़्तार किया था. इन्होंने पूछताछ में बताया कि उन्होंने सर्टिफ़िकेट भाना राम से लिया. इसके बाद से भानाराम गिरफ़्तारी के डर से थाईलैंड, श्रीलंका, दुबई, कजाकिस्तान और नेपाल समेत अन्य देशों में फ़रारी काट रहा था. 

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