ईसरदा पेयजल परियोजना को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने है. NDTV पर दौसा से कांग्रेस विधायक डीसी बैरवा ने कहा कि यदि पंचायत और नगर निकाय चुनाव से पहले भाजपा सरकार ईसरदा योजना का उद्घाटन करती है, तो वह अपने विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे. उन्होंने कहा कि यह गहलोत सरकार की देन है, जिस पर भाजपा ने कई रोड़े अटकाये थे. अब भाजपा इसका जल्द उद्घाटन कर श्रेय लेना चाहती है.
"श्रेय लेना चाहती है बीजेपी सरकार"
कांग्रेस विधायक डीसी बैरवा ने कहा कि ईसरदा योजना मूल रूप से पूर्व की कांग्रेस सरकार कि योजना है. दौसा में पानी आना तय है, और यह लगभग फाइनल हो चुका है, लेकिन भाजपा सरकार केवल उद्घाटन कर इसका राजनीतिक श्रेय लेना चाहती है. उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत चुनाव नजदीक आने के कारण भाजपा सरकार जनता के बीच वाहवाही लूटने का प्रयास कर रही है.
"एक साल से पहले ईसरदा का पानी नहीं आ पाएगा"
विधायक बैरवा ने कहा कि भाजपा चाहे जितनी कोशिश कर ले, लेकिन भजनलाल सरकार साल भर के भीतर दौसा में ईसरदा का पानी नहीं ला सकती. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "पंचायत चुनाव के दौरान जनता ही भाजपा को पानी पिला देगी." डीसी बैरवा ने यह भी कहा कि ईसरदा योजना का करीब 80% कार्य पहले ही पूरा हो चुका है, और अब भाजपा सरकार केवल श्रेय लेने के लिए हवा बना रही है.
"दौसा की जनता को जल्द मिलेगा पानी"
उन्होंने सरकार से मांग की है कि श्रेय की राजनीति छोड़कर योजना के शेष कार्यों को गंभीरता से पूरा किया जाए. हालांकि, विधायक ने यह भी कहा कि यह खुशी की बात है कि दौसा की जनता को जल्द पानी मिलेगा. चाहे श्रेय कोई भी ले, लेकिन सच्चाई यह है कि ईसरदा योजना कांग्रेस की देन है. विधायक के इस बयान के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है, और आने वाले पंचायत और नगर निकाय चुनावों में ईसरदा योजना बड़ा सियासी मुद्दा बन सकता है.
"1256 गांवों को मिलेगा पानी"
सवाई माधोपुर और दौसा जिले के 7 छोटे बड़े शहरों के साथ 1256 गांवों को इस ईसरदा पेयजल परियोजना से लाभ मिलेगा. यह बांध सवाई माधोपुर और टोंक जिलों की सीमा पर स्थित है, और इसका निर्माण बनास नदी पर हुआ है. इस परियोजना से दौसा और सवाई माधोपुर जिलों के कई शहर और गांवों को लाभ मिल सकेगा,जिससे इन क्षेत्रों की पानी की समस्या दूर हो सकेगी.
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