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'सरकार चाहती है जनता बीमारी से तड़प कर मर जाए' राइट टू हेल्थ पर मंत्री खींवसर के बयान पर बोले डोटासरा 

डोटासरा ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट पिछले डेढ़ साल से सरकार से पूछ रहा है कि राइट टू हेल्थ कानून को लागू क्यों नहीं किया जा रहा, लेकिन सरकार वहां जवाब नहीं दे रही है और यहां सदन में चर्चा से बच रही है.

'सरकार चाहती है जनता बीमारी से तड़प कर मर जाए' राइट टू हेल्थ पर मंत्री खींवसर के बयान पर बोले डोटासरा 
गोविन्द सिंह डोटासरा

Right to Health: पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने राइट टू हेल्थ (RTH) को लेकर सरकार के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि आज ऐसी व्यवस्था बना दी गई है कि जनता बीमारी में तड़पती रहे, उसे इलाज न मिले. यदि किसी मरीज की प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो परिजनों को पूरा भुगतान किए बिना शव तक नहीं दिया जाता. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है.

डोटासरा ने कहा कि कर्मचारियों के लिए लागू आरजीएचएस योजना भी प्रभावित हो रही है. प्राइवेट अस्पताल इससे बाहर हो रहे हैं, फार्मेसियों को भुगतान नहीं हो रहा है और नए इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कोई बजट नहीं दिया जा रहा. कांग्रेस सरकार ने हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की पहल की थी, लेकिन अब दो-तीन जिलों में उन्हें बंद किया जा चुका है. उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे राजस्थान में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर अराजकता का माहौल है और लोग परेशान हैं कि आखिर इलाज के लिए जाएं तो कहां जाएं.

''हर व्यक्ति को बेहतर और सुलभ इलाज मिले''

उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा ही नहीं है कि हर व्यक्ति को बेहतर और सुलभ इलाज मिले, बिना किसी आर्थिक शोषण के. डोटासरा ने कहा कि इससे अधिक शर्मनाक बयान नहीं हो सकता कि कांग्रेस सरकार द्वारा 25 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की जो योजना लाई गई थी, उसका गला घोंट दिया गया. आरजीएचएस को भी कमजोर कर दिया गया और बड़े निजी अस्पतालों को खुली लूट की छूट दे दी गई.

''सरकार को लोगों के स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं''

उन्होंने कहा कि यदि सरकार राइट टू हेल्थ कानून लागू नहीं करना चाहती तो स्पष्ट रूप से जनता को बता दे. यह बेहद निंदनीय है. कांग्रेस इस मुद्दे पर सड़क और सदन दोनों में आंदोलन करेगी और एक अभियान चलाएगी, ताकि जनता को बताया जा सके कि सरकार को लोगों के स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं है.

''सरकार केवल राजनीतिक मुद्दों में उलझी हुई है''

डोटासरा ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट पिछले डेढ़ साल से सरकार से पूछ रहा है कि राइट टू हेल्थ कानून को लागू क्यों नहीं किया जा रहा, लेकिन सरकार वहां जवाब नहीं दे रही है और यहां सदन में चर्चा से बच रही है. यदि न्यायालय में लंबित मामलों पर चर्चा ही नहीं हो सकती, तो फिर सदन में चर्चा किस बात की होगी? उन्होंने सरकार पर स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी और सामाजिक सुरक्षा जैसे जनकल्याणकारी क्षेत्रों की अनदेखी का आरोप लगाया. साथ ही यह भी कहा कि सरकार केवल राजनीतिक मुद्दों में उलझी हुई है.

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