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This Article is From Aug 19, 2025

चोर-डाकुओं के आते ही मूर्त‍ि से आने लगती थी आवाज! हर बार डरकर भाग जाते थे बदमाश

सीकर के रींगस में बूची शक्‍त‍ि मां का मंद‍िर है, जो अद्भुत और अनोखे इत‍िहास का गवाह है. गांव के लोगों का कहना है क‍ि बूची शक्‍ति मां गांव को चोर-डाकुओं से बचाते थीं.

चोर-डाकुओं के आते ही मूर्त‍ि से आने लगती थी आवाज! हर बार डरकर भाग जाते थे बदमाश
बूची शक्‍त‍ि मां की मूर्ति.

राजस्थान के सीकर जिले के रींगस कस्बे में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जिसकी मूर्ति से कस्बे में आने वाले चोर-डाकुओं के खिलाफ आवाज आने लगती थी. गांव के लोगों का कहना है क‍ि पहले जब भी कस्बे में चोरों या डाकुओं का हमला होता था, तो मां के मंदिर से तेज आवाज आने लगती थी, जिससे कस्बे के लोग जाग जाते थे. चोर-डाकू लूट की घटनाओं को अंजाम नहीं दे पाते थे.

"तीन देवता आपस में बातें करते थे"

पुरानी मान्यताओं के अनुसार, रींगस (शेखावाटी) के 3 देवता आपस में बातें करते थे, जिनमें श्मशान के भैरो बाबा का मंदिर, बूची शक्ति मां का मंदिर और आमली वाले बालाजी का मंदिर मुख्य रूप से आते हैं. वरिष्ठ पत्रकार गोविंद शर्मा ने बताया क‍ि रींगस को शेखावाटी का तोरण द्वार माना जाता है, यहां की भूमि रण भूमि के लिए जानी जाती थी. यहां शेखावाटी और जयपुर के शासकों के बीच अक्सर युद्ध होता रहता था, और इस युद्ध भूमि में ही रींगस के श्मशान वाले भैरो बाबा का मंदिर था, और यहां से ठीक 1 किलोमीटर की दूरी पर बूची शक्ति मां का मंदिर है.

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आपदा के समय मां कर देती थीं संकेत 

उन्होंने बताया क‍ि रींगस में जब भी कोई आपदा आती थी, तो मां बूची शक्ति आवाज देकर शहर वासियों और आसपास के ग्रामीणों सचेत कर देती थीं. पुरानी किंवदंती पर नजर डालें तो एक बार कुछ डाकुओं ने साजिश रचकर और भक्त का वेश धारण कर मां की मूर्ति से कान और नाक के कुंडल निकाल लिए थे. कहा जाता है कि उस दिन से मां के मंदिर से आवाजें आना बंद हो गईं. स्थानीय लोगों को आज भी इंतजार है कि जब भी कस्बे पर कोई आपदा आएगी मां उन्हें अवश्य आवाज देंगी.

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हर साल सितंबर में भरता है मेला 

यह मंदिर वैश्य समाज के मित्तल और गर्ग गोत्र की कुलदेवी मानी जाती हैं. और आज भी देशभर से मित्तल और गर्ग गोत्र के लोग माता की पूजा-अर्चना करने आते हैं. मित्तल गोत्र के व्यावसायी राम अवतार मित्तल बताते हैं कि सितंबर महीने में 1 और 2 तारीख को माता का मेला भरता है, जिसमें देशभर से मित्तल और गर्ग गोत्र के लोग इकट्ठा होते हैं.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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