Health News: बीमार पड़ने लगे हैं. हड्डियों की कमजोरी, जोड़ों का दर्द और थकान आम समस्या बन चुकी है. ऐसे में तिल एक प्राकृतिक उपाय है जो शरीर को भीतर से मजबूत करता है.
तिल में छिपा पोषण का खजाना
तिल के छोटे-छोटे बीज कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे जरूरी मिनरल्स से भरपूर होते हैं. कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस उनकी संरचना को बेहतर करते हैं. यही कारण है कि तिल को हड्डियों का वरदान कहा जाता है.
ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव
बढ़ती उम्र में खासकर महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों की कमजोरी की समस्या आम है. तिल का नियमित सेवन इस जोखिम को कम करता है. भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी तिल को हड्डियों का भरोसेमंद साथी बताता है.
जोड़ों के दर्द में राहत
तिल में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन और दर्द को नियंत्रित करते हैं. अर्थराइटिस या जोड़ों की जकड़न वाले लोगों के लिए तिल बेहद फायदेमंद है.
सर्दियों में तिल का महत्व
सर्दियों में तिल शरीर को गर्म रखने के साथ हड्डियों को मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाता है. तिल-गुड़ के लड्डू पारंपरिक रूप से लोकप्रिय हैं और सेहत के लिए बेहद लाभकारी हैं.
सेवन का सही तरीका
विशेषज्ञों के अनुसार रोजाना 1-2 चम्मच तिल खाना पर्याप्त है. इसे भूनकर, सलाद में डालकर या लड्डू बनाकर खाया जा सकता है. काले और सफेद दोनों तिल फायदेमंद हैं, हालांकि अधिक मात्रा से बचना चाहिए क्योंकि इसमें कैलोरी भी ज्यादा होती है.
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