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World Migratory Bird Day: केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में हर साल हज़ारों KM का सफर तय करके आते हैं प्रवासी पक्षी  

घना में साइबेरिया, मंगोलिया, सेंट्रल एशिया से ज्यादा संख्या में पक्षी यहां पहुंचते हैं. बर्फीले देशों में सर्दी के मौसम में जब बर्फ पड़ती है तो पक्षियों के लिए भोजन उपलब्ध नहीं हो पाता. इसलिए ये पक्षी भोजन और प्रजनन के लिए उड़कर यहां पहुंचते हैं. अक्टूबर में ये पक्षी यहां आना शुरू कर देते हैं और प्रजनन काल पूरा कर फरवरी अंत से मार्च तक बच्चों के साथ उड़ान भर जाते हैं.

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World Migratory Bird Day: केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में हर साल हज़ारों KM का सफर तय करके आते हैं प्रवासी पक्षी  
घना में विचरण करते प्रवासी पक्षी

Keoladeo National Park: विश्व प्रवासी पक्षी दिवस साल में दो बार मनाया जाता है.एक तो 11 मई और दूसरा 12 अक्टूबर को. आज 11 मई है यानि विश्व प्रवासी पक्षी दिवस है. भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में हर साल 200 से अधिक प्रजाति के विदेशी पक्षी प्रवास पर आते हैं. इसलिए यह 'पक्षियों का स्वर्ग' कहलाता है. बर्फीले देशों से सर्दी के मौसम में ये पक्षी भोजन और प्रजनन के लिए घना पहुंचते हैं. डीएफओ मानस सिंह ने बर्ड सेंचुरी में आने वाले माइग्रेटी बर्ड्स के बारे में बताया और पार्क में विदेशी पक्षियों का प्रति वर्ष और अधिक संख्या में आकर्षित करने के लिए क्या क्या प्रयास किए जा रहे है.

डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि उद्यान में 350 से अधिक प्रजाति के पक्षी प्रवास पर आते हैं. इनमें से करीब 120 प्रजाति के विदेशी पक्षी यहां प्रवास करते हैं. साथ ही करीब 80 से अधिक प्रजाति और विदेशी पक्षी कम समय के लिए या पासिंग प्रवास के लिए यहां रुकते हैं. ऐसे में करीब 200 से अधिक प्रजाति के विदेशी पक्षी घना में सर्दी के मौसम में प्रवास करते हैं.

साइबेरिया, मंगोलिया, सेंट्रल एशिया से आते हैं पक्षी 

उन्होंने बताया कि, साइबेरिया, मंगोलिया, सेंट्रल एशिया से ज्यादा संख्या में पक्षी यहां पहुंचते हैं. बर्फीले देशों में सर्दी के मौसम में जब बर्फ पड़ती है तो पक्षियों के लिए भोजन उपलब्ध नहीं हो पाता. इसलिए ये पक्षी भोजन और प्रजनन के लिए उड़कर यहां पहुंचते हैं. अक्टूबर में ये पक्षी यहां आना शुरू कर देते हैं और प्रजनन काल पूरा कर फरवरी अंत से मार्च तक बच्चों के साथ उड़ान भर जाते हैं.

5-6 महीने रहते हैं केवलादेव में 

घना में बार हेडेड गीज, पिंटेल, पोचार्ड, मेलार्ड, हाइड्रोला, कॉमन क्रेन, पेलिकन, फ्लेमिंगो, कूट, ग्रेल लेग गूज, यूटिकेरिया समेत करीब 200 प्रजाति के विदेशी पक्षी पहुंचते हैं. ये करीब 5 से 6 माह का प्रवास कर वापस अपने देश लौट जाते हैं.इसके अलावा ओपन बिल स्टार्क,पेंटेंट स्टार्क,स्पून बिल, स्पॉटेट ईगल आदि है.

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में 350 प्रजाति के पक्षी 

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में 350 से अधिक प्रजाति के प्रवासी पक्षियों के अलावा अन्य जीव भी पाए जाते हैं. यहां की जैव विविधता पूरे राजस्थान ही नहीं बल्कि देशभर में अनूठा स्थान रखती है. उद्यान में 57 प्रजाति की मछलियां, 34 प्रजाति के स्तनधारी जीव, करीब 9 प्रजाति के कछुए, 80 प्रजाति की तितलियां और 14 प्रजाति के मेंढक मिलते हैं.

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