Bhiwadi Factory Blast: आज बात उस 'बारूद के ढेर' की, जिस पर अलवर के खुशखेड़ा को पिछले 6 महीनों से बिठाया गया था.... खुशखेड़ा ब्लास्ट कोई हादसा नहीं, बल्कि एक 'सिस्टम मर्डर' है....इसीलिए सवाल सीधा सा है—कि जब थाने से एक किलोमीटर की दूरी पर मौत का सामान बन रहा था, तो पुलिस की नाक और आंखें क्यों बंद थीं? चर्चा गरम है कि इस काले कारोबार का असली रिमोट कंट्रोल किसी अपराधी के पास नहीं, बल्कि 'वर्दी' के पास था.... मुख्य आरोपी हेमंत शर्मा का भाई पुलिस की स्पेशल टीम यानि (DST) में तैनात है... तो क्या खाकी के रसूख ने ही इस अवैध फैक्ट्री को अभयदान दे रखा था? अब इसमें हैरानी की बात तो ये है कि कागजों में उस फैक्ट्री में 'कपड़े' बन रहे थे, लेकिन असलियत में वहां 'कंकाल' बन रहे थे... सवाल ये कि निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी उस वक्त कहाँ थे जब खुशखेड़ा में बारूद जमा हो रहा था? क्या ज़िला प्रशासन और पुलिस की सरपरस्ती के बिना ये काला धंधा मुमकिन था? और सबसे बड़ा सवाल—क्या 'वर्दी वाले भाई' की जांच होगी या उसे क्लीन चिट देने की तैयारी है? आज इसी पर होगी बात...... #BhiwadiFireCase #rajasthannews #BhiwadiAgnikand #factoryfire #justiceforvictims #breakingnews