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अलवर: औद्योगिक हब बन रहा है राजस्थान का 'सिंह द्वार' कहा जाने वाला यह जिला

अलवर की स्थापना साल 1775 में रावराजा प्रतापसिंह द्वारा की गई थी. राजस्थान के पूर्व में अरावली पर्वत शृंखला के बीच बसे अलवर को 'पूर्वी राजस्थान का कश्मीर' और 'राजस्थान का स्कॉटलैंड' नाम से भी जाना जाता है.

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अलवर: औद्योगिक हब बन रहा है राजस्थान का 'सिंह द्वार' कहा जाने वाला यह जिला
अलवर में 14वीं से 19वीं शताब्दी के बीच बनी कई इमारतें मशहूर हैं, जिनमें सिटी पैलेस भी शामिल है...

राजपूतों की भूमि कहा जाने वाला राजस्थान अपनी शानदार वास्तुकला, रंगीन संस्कृति और मनमोहक पर्यटक स्थलों के लिए देश ही नहीं, विदेशों में भी प्रसिद्ध है. राज्य के कई जिले ऐसे हैं, जहां की खूबसूरती से प्रभावित होकर लोग यहां बार-बार खिंचे चले आते हैं. ऐसा ही एक जिला है अलवर. राजस्थान के पूर्व में अरावली पर्वत शृंखला के बीच बसे अलवर को 'पूर्वी राजस्थान का कश्मीर' और 'राजस्थान का स्कॉटलैंड' नाम से भी जाना जाता है. देश की आजादी के बाद 1948 में अलवर रियासत का 3 अन्य रियासतों भरतपुर, धौलपुर और करौली के साथ मत्स्य संघ में विलय कर दिया गया था. इसके बाद 1949 में मत्स्य संघ का राजस्थान राज्य में विलय हो गया था.

महाभारत काल से जुड़ा है इतिहास
वैसे तो आधुनिक अलवर की स्थापना साल 1775 में रावराजा प्रतापसिंह द्वारा की गई थी. हर साल 25 नवंबर को इसकी स्थापना का जश्न 'मत्स्य उत्सव' के रूप में मनाया जाता है. लेकिन इस क्षेत्र का जिक्र महाभारत काल में भी मिलता है. महाजनपद काल में यह क्षेत्र मत्स्य जनपद का भाग था और मीन वंशीय इसके शासक थे. इसकी राजधानी विराटनगर थी. महाभारत के मुताबिक पांडवों ने अपना अज्ञातवास विराटनगर क्षेत्र में ही बिताया था.

अलवर के मनमोहक पर्यटन स्थल
राजस्थान का यह खूबसूरत जिला सुंदर झीलों, भव्य महलों, शानदार मंदिरों, विशाल स्मारकों और किलों के लिए प्रसिद्ध है. यहां हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक घूमने आते हैं. अलवर में 14वीं से 19वीं शताब्दी में निर्मित कई इमारतें, मकबरे और धार्मिक स्थल हैं. यहां के प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में बाला किला, सिटी पैलेस, मूसी महारानी की छतरी, राजकीय संग्रहालय, कंपनी बाग, सिलीसेढ़ झील, जयसमन्द झील, विनय मंदिर महल, भतृहरि, नीलकंठ, तालवृक्ष हैं. इसके अलावा राज्य में सरिस्का वन्य जीव अभयारण्य भी है, जो कि यहां स्थित टाइगर रिजर्व के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. इस टाइगर रिजर्व को बाघ की मांद भी कहा जाता है. इसके अलावा इस अभयारण्य को हरे कबूतरों के लिए भी जाना जाता है. इस अभयारण्य में सरिस्का महल और पांडुपोल जैसे दार्शनिक स्थल भी मौजूद हैं.

औद्योगिक क्षेत्र के रूप में हो रहा विकसित
राजस्थान का यह जिला औद्योगिक हब के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है. यहां स्वदेशी के साथ ही जापान, फ्रांस, जर्मनी व यू.एस.ए समेत कई विकसित देशों की मल्टी-नेशनल कंपनियां हैं. यहां करीब 2500 से ज्यादा बड़े व लघु उद्योग स्थापित हैं, जिसमें पेप्सी, होण्डा, जगुआर, कजारिया और रिलैक्सो जैसी कंपनियां भी शामिल हैं. दरअसल अलवर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, यानी NCR में शामिल है, इसलिए यह औद्योगिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है. जिले के भिवाड़ी, खुशखेड़ा टपूकड़, तिजारा, खो दरीबा, बहरोड़, थानागाजी नीमराणा और राजगढ़-पुरबा नगरों औद्योगिक क्षेत्र के रूप में और अधिक विकसित किया जा रहा है.

आइए, एक नज़र अलवर से जुड़ी अहम जानकारियों पर

  • शराब उत्पादन के लिए जिले को राजस्थान का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है.
  • अलवर खनिज संपदा के मामले में काफी समृद्ध है. यहां संगमरमर, ग्रेनाइट, फेल्सपार, डोलोमाइट, क्वार्ट्ज, चूना पत्थर, सोप-स्टोन, बेराइट्स, सिलिका, बजरी रेत, इमारती पत्थर, पट्टी कतला, ईंट मृदा, चेर्ट, पाईरोहाईट आदि खनिज प्राप्त होते हैं.
  • यहां की प्रमुख फसलें मक्का, ज्वार, तिल, कपास, गेहूं, जौ, चना, सरसों, तारामीरा और दालें हैं.
  • अलवर जिला जयपुर संभाग में आता है. जिले में 16 पंचायत समितियां, 565 ग्राम पंचायत और 18 तहसील हैं.
  • जिले में कुल 11 विधानसभा सीटें - अलवर शहर, अलवर ग्रामीण, बांसुर, बहरोड, कठुमर, किशनगढ़, मुंडावर, राजगढ़-लक्ष्मणगढ़, रामगढ़, थानागाजी, तिजारा हैं.

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