
रणथंभौर का प्रवेशद्वार कहा जाने वाला सवाई माधोपुर वाकई एक ऐतिहासिक शहर है. अरावली और विंध्य के पहाड़ों से घिरा हुआ यह शहर पर्यटकों के लिए एक आदर्श जगह है. हाल ही में यहां बना हुआ रणथंभौर नेशनल पार्क यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल हुआ है. इस नेशनल पार्क का मुख्य आकर्षण यहां के बाघ हैं, जिन्हें देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक हर साल लाखों की संख्या में आते हैं. यह शहर इसके अलावा अपने किलों के लिए भी जाना जाता है.
कैसा रहा है इस शहर का इतिहास
सवाई माधोपुर का इतिहास कई सौ साल पुराना है. यह पहले रणथंभौर राज्य के अधीन था. इस शहर की नींव महाराजा सवाई माधोसिंह ने साल 1765 में रखी थी. इसकी मुख्य वजह थी मराठाओं का पश्चिम भारत में बढ़ता हुआ प्रभाव. इसके चलते सवाई माधोसिंह ने मुगलों से रणथंभौर का किला मांगा ताकि मराठाओं को रोका जा सके. लेकिन मुगलों ने उनकी बात को नकार दिया जिसके बाद माधोसिंह ने शेरपुर गांव को अपना ठिकाना बनाते हुए उसको खुद के नाम पर सवाईमाधोपुर नाम दिया. हालांकि दो साल बाद मुगलों ने भी उन्हें किला दे दिया था.
औद्योगिक विकास और संस्कृति
सवाई माधोपुर की जनता मुख्य रूप से रणथंभौर आने वाले पर्यटकों से होने वाली आमदनी पर निर्भर करती है. इसके अलावा खेती भी कमाई का एक मुख्य जरिया है. सवाई माधोपुर के अमरूद काफी लोकप्रिय हैं. यहां पारंपरिक दवाईयां और तेल बनाने का काम भी होता है. बात अगर संस्कृति की करें तो, तो यहां ढूंढरी भाषा बोली जाती है. इसके अलावा लोकप्रिय नृत्य घूमर और कालबेलिया भी शहर की विशेषताओं में से हैं.
पर्यटन स्थल और मुख्य आकर्षण
अगर बात करें मुख्य आकर्षण और पर्यटन स्थल की तो देशभर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में रणथंभौर नेशनल पार्क का नाम आता है. जिसके लिए यहां देश-विदेश से हर साल लाखों लोग घूमने आते हैं. इसके अलावा रणथंभौर का किला भी पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है. यहां राजीव गांधी प्राकृतिक संग्रहालय भी मौजूद है. इन सबके अलावा कई सारे मंदिर भी मुख्य आकर्षण का केंद्र हैं.
सवाई माधोपुर एक नजर में
- जिला मुख्यालय - सवाई माधोपुर
- क्षेत्रफल - 10527 वर्ग किमी
- जनसंख्या - 1,335,551
- जनसंख्या घनत्व - 297/वर्ग किमी
- लिंगानुपात - 894/1000
- साक्षरता -66.19%
- तहसील -7
- पंचायत समिति - 7
- संभाग -भरतपुर
- विधानसभा क्षेत्र - 4
- लोकसभा क्षेत्र-1