Mysterious deaths in the Nahargarh Hills jaipur: राजस्थान के जयपुर में नाहरगढ़ क़िले के आस-पास कई मौतें हो चुकी है. इस किले को लेकर एक किवदंती यह भी है कि यहां कई ऐसी अजीबोगरीब घटनाएं हुई हैं जो रहस्यमय बनी हुई हैं. जिसके चलते इस किले को अब हॉन्टेड प्लेस या फिर डरावना किला नाम दे दिया गया. यही नहीं, कहा जाता है कि इस खूबसूरत किले और इसकी पहाड़ियों में भटकती प्रेमात्मा का साया है, जिसे आज भी 'मुक्ति' नहीं मिली है.
1734 में नाहरगढ़ फोर्ट का निर्माण हुआ था कहा जाता है कि राजा जयसिंह जब इस किले का निर्माण करवा रहे थे तब रातों-रात अचानक यह किला गिर जाता था, दिनभर मजदूर काम करते थे और रात में प्रेत आत्मा किले को गिरा देती थी. कहा जाता है कि विद्वान और तांत्रिकों ने उस बताया कि नारगढ़ जिले में युवराज नाहर सिंह की आत्मा है उसके बाद नाहरसिंह भोमिया जी का मंदिर बनाया गया तब जाकर किले का निर्माण शुरू हुआ.
इस क़िले में और इसके आस-पास कई मौतें हो चुकी हैं. जिनकी गुत्थी आज तक नहीं सुलझ सकी है.
जब लटकी मिली थी चेतन 'तांत्रिक' की लाश
25 नवंबर 2017 को नाहरगढ़ किले की एक प्राचीर से लटकती हुई चेतन सैनी नाम के व्यक्ति की लाश मिली थी. रस्सी के सहारे लटकती चेतन की लाश को देखकर हर कोई दंग रह गया. जिस गढ़ की दीवार पर चेतन का शव मिला, उसके नीचे गहरी खाई थी. परिवार के सदस्यों को संदेह था कि चेतन की मौत हत्या है, लेकिन पुलिस के अनुसार तत्कालीन परिस्थितियां आत्महत्या का संकेत दे रही थीं.
पुलिस जांच में सामने आया कि चेतन की न किसी से दुश्मनी थी और न ही उसकी कॉल डिटेल में ऐसा कुछ मिला, जिस पर शक किया जा सके. हालांकि, चेतन के मोबाइल में उसकी एक सेल्फी फोटो मिली थी, जो घटना से कुछ समय पहले उसी नाहरगढ़ की प्राचीर पर खींची गई थी. इसके अलावा, घटनास्थल के आसपास कई पत्थरों और दीवारों पर रानी पद्मावती को लेकर लिखी गई इबारतें भी मिलीं, जिनका रहस्य आज तक नहीं सुलझ पाया है.
''चेतन तांत्रिक मारा गया-पद्मावती''
इन पत्थरों पर ''चेतन तांत्रिक मारा गया-पद्मावती'' लिखा होना और उसी स्थान पर चेतन सैनी की लाश मिलना, इस पूरे मामले को और रहस्यमय बना देता है. यह प्रसंग आज भी अनसुलझा है और कई सवाल खड़े करता है, जिनका जवाब अब तक सामने नहीं आ सका है.

1 सितंबर 2024 को दो भाइयों की हुई थी मौत
इसके बाद 1 सितंबर 2024 को जयपुर के शास्त्रीनगर निवासी दो सगे भाई, राहुल पाराशर और आशीष पाराशर, अपने घर से नाहरगढ़ पहाड़ी पर ट्रेकिंग के लिए निकले थे. चरण मंदिर के दर्शन कर लौटते समय दोनों रास्ता भटक गए और कुछ देर बाद आपस में बिछड़ गए. सूचना मिलने पर पुलिस ने तलाश शुरू की, जिसमें पहाड़ी के एक छोर पर आशीष की लाश मिली, लेकिन बड़े भाई राहुल का कोई सुराग नहीं लग सका.
पुलिस ने जमीन से लेकर आसमान तक सर्च अभियान चलाया, लेकिन आज दिन तक न राहुल जिंदा मिला और न ही उसका शव बरामद हुआ. आशीष के शव के पोस्टमार्टम में गर्दन और सिर पर गहरी चोट के निशान मिले, लेकिन यह हत्या थी या कोई हादसा, यह भी रहस्य ही बना रहा.
राहुल की माता ने NDTV से बातचीत में बताया, ''अभी भी उम्मीद है कि उनका खोया हुआ बेटा लौटकर आएगा. वहीं उन्होंने सरकार से गुहार की थी. हमारी आर्थिक मदद की जाए और परिवार में दो ही बेटे थे. दोनों ही चले गए. परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है. हमें उम्मीद है कि उनका बेटा लौट आया था''
2014 और 2015 में भी नाहरगढ़ में हो चुकी हैं घटनाएं
इससे पहले 2014 और 2015 में भी नाहरगढ़ किले और उसके जंगलों में कई संदिग्ध घटनाएं और हादसे हुए, जिनका खुलासा नहीं हो सका. आज भी नाहरगढ़ किले की ओर जाने वाले कुछ खतरनाक मोड़ों पर लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं, खासकर एक खास रास्ते पर सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं होना चिंता का विषय बना हुआ है, जिस पर प्रशासन भी गंभीरता से विचार कर रहा है.