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This Article is From Jan 13, 2026

अवैध खनन के खिलाफ ACB ऐक्शन; अधिकारियों, कर्मचारियों, क्रेशर मालिकों और ठेकेदारों पर कसा शिकंजा

एसीबी की जांच में सामने आया है कि इन सभी ने आपस में मिलीभगत कर लाखों टन खनिज संपदा का अवैध खनन किया और बंद खदानों के रवन्नों का दुरुपयोग कर उसे वैध खनन के रूप में दिखाया.

अवैध खनन के खिलाफ ACB ऐक्शन; अधिकारियों, कर्मचारियों, क्रेशर मालिकों और ठेकेदारों पर कसा शिकंजा
अरावली क्षेत्र में अवैध खनन बहुत बड़ी समस्या है (File)

अवैध खनन के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो एसीबी (ACB) ने खनिज विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों, क्रेशर मालिकों और रॉयल्टी ठेकेदारों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इनके ऊपर अवैध खनन को वैध दर्शाकर सरकार को भारी राजस्व हानि पहुंचाने का आरोप है. जयपुर स्थित एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर भरतपुर इकाई ने प्राथमिक जांच के बाद यह कार्रवाई की है.

एसीबी को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया था कि खनिज विभाग भरतपुर के अधिकारी कर्मचारी, क्रेशर मालिक और रॉयल्टी ठेकेदार बंद पड़ी खदानों के रवन्नों का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर अवैध खनन करा रहे हैं और उसे वैध खनन के रूप में दर्शाया जा रहा है. इससे सरकार को लाखों टन खनिज के रूप में भारी राजस्व नुकसान हुआ.

खनिज विभाग के कई वर्तमान और पूर्व कर्मियों पर आरोप

प्राथमिक जांच में एसीबी ने पाया कि इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन और वर्तमान खनिज विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है. आरोपियों में तत्कालीन खनिज अभियंता भरतपुर और वर्तमान में कोटा पदस्थ रामनिवास मंगल, खनिज कार्यदेशक द्वितीय वीरेंद्र कुमार, तत्कालीन खनिज अभियंता राजेंद्र सिंह, तत्कालीन सर्वेयर संजू सिंह और तत्कालीन कार्यदेशक प्रथम भीम सिंह शामिल हैं.

इसके अलावा लीज मालिक अभिषेक तंवर, जेपी एंड ब्रॉस, पारस इन्फ्रा, सीडीएस इन्फ्रा, बालाजी एंड कंपनी और शुभ लाभ स्टोन क्रेशर के मालिकों के साथ ही रॉयल्टी ठेकेदार मैसर्स देव दशरथ और अन्य के नाम भी प्रकरण में दर्ज किए गए हैं.

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मिलीभगत कर सरकार को पहुंचाया घाटा

एसीबी की जांच में सामने आया है कि इन सभी ने आपस में मिलीभगत कर लाखों टन खनिज संपदा का अवैध खनन किया और बंद खदानों के रवन्नों का दुरुपयोग कर उसे वैध खनन के रूप में दिखाया. जांच में यह भी सामने आया है कि खनिज विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने पद का दुरुपयोग कर इस पूरे खेल को संरक्षण दिया, जिससे सरकार को भारी राजस्व हानि हुई.

एसीबी ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है. फिलहाल प्रकरण में अग्रिम अनुसंधान जारी है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.

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